मजबूत और विकसित भारत का निर्माण केवल देश की मूल भाषाओं की नींव पर ही किया जा सकता है:मुर्मू
मजबूत और विकसित भारत का निर्माण केवल देश की मूल भाषाओं की नींव पर ही किया जा सकता है:मुर्मू
(फाइल फोटो के साथ)
वर्धा, 16 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण केवल देश की मूल भाषाओं की नींव पर ही किया जा सकता है।
मुर्मू ने कहा कि भारत की सभी विविध भाषाओं में संस्कृति, संवेदनशीलता और चेतना की एक ही धारा बहती है। उन्होंने लोगों से अपनी मातृभाषा के अलावा कम से कम एक भारतीय भाषा सीखने की अपील की।
राष्ट्रपति महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 1936 में यहीं वर्धा में, महात्मा गांधी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आचार्य काका कालेलकर के साथ मिलकर हिंदी भाषा को बढ़ावा देने एवं उसका प्रचार-प्रसार करने के लिए ‘राष्ट्रभाषा प्रचार समिति’ की स्थापना की थी। उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी की मातृभाषा गुजराती थी, नेताजी की मातृभाषा बांग्ला और काकासाहेब की मातृभाषा मराठी थी।’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इन महान आत्माओं ने देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के माध्यम के रूप में हिंदी की शक्ति को पहचाना एवं इसका उपयोग किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, हिंदी ने देश भर के लोगों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का आह्वान हिंदी में किया था।’’
उन्होंने विश्वविद्यालय के नाम की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता के नाम पर इसका नाम रखना पूरी तरह से इतिहास के अनुरूप है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की आत्मा भारतीय भाषाओं में अभिव्यक्ति पाती है तथा हमारी सभी विविध भारतीय भाषाओं में संस्कृति, संवेदनशीलता और चेतना की एक ही धारा बहती है।’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यही कारण है कि मैं या मेरे जैसे अन्य ओडिया भाषी, हिंदी में मुंशी प्रेमचंद की कहानियों या महादेवी वर्मा की कविताओं के ओडिया अनुवाद पढ़ते समय उनसे सहजता से जुड़ सकते हैं। इसी तरह, हिंदी पाठक, फकीर मोहन सेनापति, गोपीनाथ मोहंती और प्रतिभा रे जैसे ओडिया साहित्यकारों से जुड़ते हैं। बांग्ला और संस्कृत के मिश्रण से बना हमारा राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ सभी भारतीयों की भावनाओं को एक सूत्र में बांधता है।’’
उन्होंने विद्यार्थियों से भारत की विरासत और इसकी भाषाओं पर गर्व करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अक्सर एक लोकप्रिय ओडिया कविता की एक पंक्ति उद्धृत करती हूं और मुझे यह आज भी प्रासंगिक लगती है - ‘जितनी अधिक भाषाएं सीख सकते हैं सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा का सम्मान करें।’’
मुर्मू ने कहा, ‘‘सभी भारतीय भाषाएं हमारी अपनी हैं। प्रत्येक भारतीय को अपनी स्थानीय भाषा के अलावा कम से कम एक और भारतीय भाषा सीखनी चाहिए।’’
भाषा
राजकुमार सुरेश
सुरेश
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Web Title: मजबूत और विकसित भारत का निर्माण केवल देश की मूल भाषाओं की नींव पर ही किया जा सकता है:मुर्मू
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