बांग्लादेश 2024 में फासीवाद से मुक्त हुआ: प्रधानमंत्री रहमान ने संरा महासभा में कहा

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बांग्लादेश 2024 में फासीवाद से मुक्त हुआ: प्रधानमंत्री रहमान ने संरा महासभा में कहा

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 12:38 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 12:38 PM IST

संयुक्त राष्ट्र, 25 सितंबर (भाषा) बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कहा कि देश 2024 में फासीवाद से मुक्त हुआ और देश को फासीवादी शासन तथा शोषण से हुई क्षति से उबारने के लिए सरकार पुनर्प्राप्ति, पुनर्स्थापन और पुनर्निर्माण की रणनीति पर काम कर रही है। रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह बात कही।

रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘बांग्ला भाषा’ में भाषण दिया। वह अपने परिवार के तीसरे सदस्य हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया है। उनसे पहले उनके पिता एवं पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान तथा उनकी मां एवं पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया महसभा को संबोधित कर चुकी हैं।

रहमान के पिता जियाउर रहमान ने 1980 में और उनकी मां ने 1993 में वैश्विक नेताओं को संबोधित किया था।

बृहस्पतिवार को यूएनजीए में अपने पहले संबोधन में रहमान ने कहा, ‘‘डेढ़ दशक से अधिक समय तक के फासीवादी शासन और शोषण को समाप्त करने के बाद बांग्लादेश 2024 में फासीवाद से मुक्त हुआ।’’

उन्होंने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र की आम बहस में कहा,‘‘ फासीवादी शासन के दौरान जबरन गायब किए जाना, हत्या, अपहरण, भ्रष्टाचार, लूट और धनशोधन आदि सामान्य बात हो गई थी लेकिन इनसे मुक्त होने के बाद बांग्लादेश एक बार फिर से लोकतंत्र के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’’

उन्होंने कहा कि फासीवादी शासन एवं शोषण से बुरी तरह प्रभावित बांग्लादेश को फिर से खड़ा करने के लिए सरकार ‘‘तीन आर- रिकवरी, रिस्टोरेशन एवं रीकंस्ट्रक्शन’’ की रणनीति पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि इस साल फरवरी में हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष राष्ट्रीय चुनाव में जनता ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को देश का शासन चलाने की जिम्मेदारी सौंपी।

रहमान ने कहा कि हर विवाद को ‘‘संवाद, कूटनीतिक प्रक्रिया और सहयोग’’ के जरिए हल किया जाना चाहिए।

रोहिंग्या संकट का उल्लेख करते हुए रहमान ने कहा कि बांग्लादेश म्यांमा से जबरन विस्थापित 12 लाख से अधिक रोहिंग्या लोगों को नौ साल से अधिक समय से शरण दे रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे हमारे संसाधनों, पर्यावरण, सुरक्षा और स्थानीय समुदायों पर भारी दबाव पड़ा है।’’

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का मानना है कि ‘‘ रोहिंग्या संकट की जड़ और उत्पत्ति म्यांमा से है और इसका समाधान भी वहीं है। इस समस्या का एकमात्र समाधान विस्थापित रोहिंग्या लोगों की उनके अपने देश म्यांमा में सुरक्षित और जल्द वापसी है।’’

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि जब तक रोहिंग्याओं को उनके देश वापस नहीं भेजा जाता, तब तक उनके लिए ‘‘जीवनरक्षक सहायता कार्यक्रम जारी रखे जाएं।’’

उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय विस्थापित रोहिंग्याओं के लिए न्याय सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो निकट भविष्य में यह एक बड़े मानवीय संकट में बदल सकता है।’’

भाषा शोभना रंजन

रंजन