ढाका, छह जनवरी (भाषा) बांग्लादेश की अंतरिम सरकार उन “जुलाई योद्धाओं” को अभियोग से बचाने के लिए एक अध्यादेश लाने की योजना बना रही है, जिनके आंदोलन ने 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के पतन का मार्ग प्रशस्त किया। स्थानीय मीडिया की खबरों में मंगलवार को यह जानकारी दी गई।
‘प्रथम आलो’ और ‘इत्तेफाक’ अखबार की खबरों में कहा गया है कि ‘जुलाई योद्धाओं’ को अभियोग से बचाने के लिए अध्यादेश लाने की कवायद की जा रही है।
खबरों के मुताबिक, गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि सरकार 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के लिए अवामी लीग सरकार की ओर से अधिनियमित ऐसे ही एक कानून को आधार बनाकर ‘जुलाई योद्धाओं’ को अभियोग से सुरक्षा प्रदान करने वाला अध्यादेश लाएगी।
खबरों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दो हालिया घटनाओं ने सरकार को यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।
पहली घटना में, कानून प्रवर्तन बलों ने 25 दिसंबर को ‘जुलाई योद्धा’ तहरीमा जन्नत सुरोवी को जबरन वसूली और ब्लैकमेल के आरोप में गिरफ्तार किया। बाद में राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित गाजीपुर की एक स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।
वहीं दूसरी घटना में, हबीगंज में गत शनिवार को पुलिस ने मेहदी हसन को गिरफ्तार किया। यह घटना हसन के भीड़ के साथ एक स्थानीय पुलिस थाने पहुंचने और प्रभारी अधिकारी (ओसी) को धमकी देने के एक दिन बाद हुई। हबीगंज की एक अदालत ने अगले दिन उसे जमानत पर रिहा कर दिया।
दो ‘जुलाई योद्धाओं’ की गिरफ्तारी के बाद ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ के कार्यकर्ताओं ने ढाका, हबीबगंज और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया था। उन्होंने तहरीमा और हसन की बिना शर्त रिहाई के साथ-साथ भविष्य में ‘जुलाई योद्धाओं’ को अभियोग से बचाने के लिए विशेष कानूनी प्रावधान करने की मांग की थी।
सूत्रों के अनुसार, अंतरिम सरकार इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद ‘जुलाई योद्धाओं’ को अभियोग से संरक्षण प्रदान करने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है।
भाषा पारुल वैभव
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