बुनिया (कांगो), 20 मई (एपी) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को कहा कि कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के फैलने का खतरा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर तो अधिक है लेकिन वैश्विक स्तर पर कम है।
यह जोखिम मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब कांगो में डब्ल्यूएचओ टीम के प्रमुख ने कहा है कि इस प्रकोप के कारण 134 संदिग्ध मौतें हुई हैं और उसके प्रसार को रोकने के लिए सहायता प्रयासों को तेज किए जाने के बावजूद यह स्थिति कम से कम दो महीने और बनी रह सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय मानते हुए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है तथा उसके लिए समन्वित जवाबी कार्रवाई की जरूरत बतायी है। मंगलवार को डब्ल्यूएचओ ने प्रकोप के ‘पैमाने और गति’ पर चिंता व्यक्त की।
इबोला उर्फ ‘बुंडीबुग्यो’ वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बुधवार को बताया कि अब तक कांगो के उत्तरी प्रांतों इटुरी और उत्तरी किवू में 51 मामले तथा युगांडा में दो मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, लगभग 600 संदिग्ध मामले और संदिग्ध मौतें भी हुई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि महामारी का पैमाना कहीं अधिक व्यापक है। हमें आशंका है कि ये संख्याएं बढ़ती रहेंगी।’’
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस का देर से पता चलना, प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का बड़े पैमाने पर पलायन और पहले से मौजूद मानवीय संकट ने राहत कार्यों को जटिल बना दिया।
उनका कहना था कि पूर्वी कांगो के कुछ हिस्से सशस्त्र विद्रोहियों के कब्जे में हैं जिससे सहायता पहुंचाने में बाधा आ रही है।
एपी राजकुमार नरेश
नरेश