कांगो में इबोला का प्रकोप इतिहास के सबसे घातक प्रकोप को पीछे छोड़ने की राह पर: डब्ल्यूएचओ

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कांगो में इबोला का प्रकोप इतिहास के सबसे घातक प्रकोप को पीछे छोड़ने की राह पर: डब्ल्यूएचओ

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  • Publish Date - August 12, 2026 / 10:02 PM IST,
    Updated On - August 12, 2026 / 10:02 PM IST

जिनेवा, 12 अगस्त (एपी) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अदानोम घेब्रेयसस ने बुधवार को कहा कि कांगो में जारी इबोला का प्रकोप इतिहास के सबसे घातक इबोला प्रकोप को भी पीछे छोड़ने की राह पर है, जिसमें 11,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

घेब्रेयसस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वर्तमान गति को देखते हुए, यह 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में हुए इबोला प्रकोप को पीछे छोड़ने की राह पर है।’’

उस प्रकोप ने पूरी दुनिया को भयभीत कर दिया था और टीका विकसित करने के प्रयासों को तेज करने के लिए झकझोर दिया था।

पूर्वी कांगों में फैले इस रोग को इतिहास में सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारी माना जा रहा है। पूर्वी कांगो का यह प्रकोप 4,300 से अधिक मामलों में 2,000 से अधिक लोगों की जान ले चुका है।

इस प्रकोप की घोषणा 15 मई को की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का अब कहना है कि जीनोम अनुक्रमण से पता चला है कि इसकी शुरुआत कई महीने पहले फरवरी में ही हो गई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी कांगो के एक सुदूर इलाके में यह प्रकोप इसकी निगरानी करने और नियंत्रित करने के प्रयासों से अधिक तेजी से फैल रहा है। उनका कहना है कि यह इलाका लगातार जारी संघर्ष से प्रभावित है और दक्षिण सूडान, युगांडा तथा रवांडा की सीमाओं के पास स्थित है।

अधिकांश नए मामले और मौतें अब भी ऐसे समुदायों से सामने आ रही हैं, जहां स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच नहीं है। यह क्षेत्र खराब बुनियादी ढांचे और अपर्याप्त सुविधाओं वाले स्वास्थ्य केंद्रों की समस्या से जूझ रहा है। कुछ स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल कर दी है।

एपी अमित पवनेश

पवनेश