भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल ‘आम तौर पर स्थिर’ : बीजिंग

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भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल ‘आम तौर पर स्थिर’ : बीजिंग

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  • Publish Date - August 12, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - August 12, 2026 / 08:32 PM IST

बीजिंग, 12 अगस्त (भाषा) चीन ने बुधवार को कहा कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल “आम तौर पर स्थिर” है। हालांकि, उसने अरुणाचल प्रदेश में सीमा के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने संबंधी खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन मीडिया के इन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या हाल में भारत के साथ कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं। चीन अरु‍णाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है।

गुओ ने कहा, “चीन-भारत सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है।”

उन्होंने बताया कि बीजिंग और नयी दिल्ली ने भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36वीं बैठक पिछले हफ्ते आयोजित की थी।

गुओ ने कहा, “दोनों पक्षों ने कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से बातचीत जारी रखने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति एवं स्थिरता कायम रखने पर सहमति जताई।”

भारत ने मंगलवार को कहा था कि वह चीन की सीमा से लगे इलाकों से जुड़े मामलों को “बेहद गंभीर” मानता है। उसने इस बात पर जोर दिया था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखना “बेहद जरूरी” है, क्योंकि सीमा की स्थिति दोनों देशों के आपसी संबंधों की आगे की दिशा तय करेगी।

यह बयान अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रुख अपनाने की अपुष्ट खबरों के बीच आया।

भारत ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान उनके आधिकारिक नामों से करने के अपने फैसले की चीन की ओर से की गई आलोचना को भी खारिज कर दिया। उसने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक “अटूट एवं अभिन्न हिस्सा” है और इस “अविवादित सत्य” को कोई नहीं बदल सकता।

वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई भीषण झड़पों और उसके बाद चार साल से ज्यादा समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। इसके बाद द्विपक्षीय रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों ने पिछले करीब एक साल से ज्यादा समय में कई कदम उठाए हैं।

अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले अंतिम दो स्थान-देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी से जुड़े समझौते को अंतिम रूप दिया था।

समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रूस के कजान में मुलाकात करके संबंध सुधारने के लिए कई फैसले लिए थे।

पिछले साल अगस्त में मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के तियानजिन शहर गए थे। एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और चिनफिंग के बीच विस्तृत बातचीत हुई थी।

इस बैठक में मोदी ने कहा था कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भाषा पारुल नरेश

नरेश