संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि दुनिया में एक ऐसी स्थिति देखी जा रही है जिसमें ‘‘हर चीज को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है’’ और ‘‘अत्यधिक प्रतिस्पर्धा’’ की सोच संस्थाओं को कमजोर कर रही है और अवरोध उत्पन्न कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की उच्चस्तरीय आम चर्चा को संबोधित करते हुए जयशंकर ने विश्व नेताओं से कहा कि शांति का मतलब सिर्फ़ युद्ध का न होना नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों के बीच रहती है, तो हम वास्तव में खाई के किनारे खड़े हैं। हमें गिराने के लिए केवल एक और कदम की जरूरत है।’’
जयशंकर ने स्थिरता, सुरक्षा और अनुमान लगाने की क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और इन्हें शांति के लिए अनुकूल माहौल के ‘‘महत्वपूर्ण तत्व’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘यदि इनमें से किसी को भी कमजोर किया जाता है, तो शांति अनिवार्य रूप से कमजोर होगी।’’
जयशंकर ने इसको लेकर चिंता जताई कि ‘‘हम वास्तव में हर चीज को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना देख रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की सोच कायम हो गई है, जो संस्थाओं को कमजोर कर रही है और अवरोध पैदा कर रही है। इसका असर वित्तीय जगत से लेकर बाजार तक पहुंच सीमित करने, आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने और प्रौद्योगिकी रोकने तक दिखाई दे रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संसाधन और संपर्क व्यवस्था विशेष रूप से दबाव बनाने के साधन बन गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, देश अब जोखिम कम करने और विविधता लाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। हालांकि इससे उनके हितों की अलग-अलग स्तर तक रक्षा हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर माहौल अब विश्वास या सद्भावना वाला नहीं रह गया है।’’
भाषा अमित आशीष
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