केप वर्डे, छह मई (एपी) नीदरलैंड के ध्वज वाले एमवी हॉनडियस क्रूज जहाज में घातक हंटावायरस का संक्रमण फैलने की पुष्टि होने के बाद दो संक्रमितों और एक अन्य संदिग्ध मरीज को निकालकर नीदरलैंड ले जाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने यह जानकारी दी।
घातक महामारी के केंद्र में रहा वह जहाज केप वर्डे के तट पर ही रुका है। इसमें 150 लोग सवार हैं और यह स्पेन के कैनरी द्वीप समूह जाने का इंतजार कर रहा है।
एसोसिएटेड प्रेस द्वारा खींची कई तस्वीरों में दिख रहा है कि स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षात्मक वस्त्रों में जहाज की ओर जा रहे हैं। जहाज से ब्रिटिश डॉक्टर सहित अन्य लोगों को निकाला जा रहा था। स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि डॉक्टर की हालत गंभीर थी, लेकिन अब उसमें सुधार हुआ है। बाद में एक एयर एम्बुलेंस रवाना हुई।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक तीन लोगों की मौत हुई है जिनमें से एक का शव जहाज पर ही है। उसने बताया कि संक्रमण के आठ संदिग्धों में पांच के हंटावायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो गई है।
हंटावायरस आमतौर पर संक्रमित चूहे के मल में होते हैं और श्वास के जरिये फैलते हैं।
यह जहाज एक अप्रैल को अटलांटिक महासागर की यात्रा पर अर्जेंटीना से रवाना हुआ था और इसको अंटार्कटिका, फ़ॉकलैंड द्वीप समूह और अन्य स्थानों पर रुकना था। हालांकि, जहाज पर उत्पन्न स्थिति के कारण यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।
इस बीमारी के फैलने के कारणों की जांच कर रहे दो अर्जेंटीनाई अधिकारियों ने कहा कि सरकार का मानना है कि नीदरलैंड के दंपति जहाज पर सवार होने से पहले उशुआइया शहर में पक्षियों को देखने गया था और संभवत: वहीं वह हंटावायरस की चपेट में आया।
उन्होंने बताया कि दंपति ने दौरे के दौरान लैंडफिल गया था और संभवतः वे चूहों के संपर्क में आए होंगे।
अधिकारियों ने पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि उशुआइया और आसपास के टिएरा डेल फ़्यूगो प्रांत में हंटावायरस का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जहाज से निकाले गए तीन लोग 41 वर्षीय नीदरलैंड का नागरिक, 56 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक और 65 वर्षीय जर्मन नागरिक हैं, जिन्हें यूरोप के विशेष अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाएगा।
एपी धीरज माधव
माधव