India Russia Oil Trade/ image source: IBC24
India Russia Oil Trade: भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अमेरिकी संसद में विपक्षी Democratic Party के सांसदों ने राष्ट्रपति Donald Trump से मांग की है कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई अस्थायी छूट को तुरंत खत्म किया जाए। डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि इस फैसले से रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है। इस बीच भारत की रिफाइनरियां लगातार रूसी तेल की खरीद बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय ऊर्जा दिग्गज Reliance Industries Limited ने मार्च में डिलीवरी के लिए करीब 60 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters को तेल उद्योग से जुड़े दो सूत्रों ने दी है।
सूत्रों के मुताबिक यह तेल कई महीनों से समुद्र में खड़े टैंकरों में फंसा हुआ था क्योंकि इसे लंबे समय तक कोई खरीदार नहीं मिल रहा था। पहले भारत ने अमेरिका के साथ हुए एक अंतरिम व्यापार समझौते के बाद रूस से तेल खरीद में कमी कर दी थी, जिसके चलते कई India Russia Oil Trade के आसपास समुद्री मार्गों में रुके हुए थे। लेकिन हाल ही में मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर दिया। दरअसल Iran, United States और Israel के बीच चल रहे संघर्ष के कारण क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे कई देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़े। इसी स्थिति को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी, जो 5 मार्च के बाद लोड किए गए जहाजों पर लागू होती है।
बताया जा रहा है कि रिलायंस ने रूस के प्रमुख ग्रेड यूराल क्रूड को वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड के मुकाबले करीब 1 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट से लेकर 1 डॉलर प्रीमियम तक की कीमत पर खरीदा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल Strait of Hormuz के रास्ते मध्य-पूर्व से आयात करता है। लेकिन क्षेत्रीय तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने से भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की ओर झुक रही हैं। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के मुताबिक इस महीने लगभग 3.3 करोड़ बैरल कच्चा तेल भारत पहुंच सकता है, जिसमें से करीब 1 करोड़ बैरल का सौदा पहले ही हो चुका है और बाकी 2.3 करोड़ बैरल इस महीने लोड होने की संभावना है।
केप्लर में रिफाइनिंग और मॉडलिंग के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट Nikhil Dubey के अनुसार, अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारतीय रिफाइनरियां तेजी से रूसी तेल खरीद रही हैं। उन्होंने बताया कि कई टैंकर, जो पहले समुद्र में बिना तय गंतव्य के खड़े थे, अब भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। Sam Liccardo और Ruben Gallego ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent को पत्र लिखकर कहा कि भारत को दी गई यह छूट “खतरनाक और आत्मघाती” कदम है और इससे रूस को सीधा फायदा मिल सकता है। अब देखना होगा कि अमेरिका इस छूट को जारी रखता है या राजनीतिक दबाव के चलते इसमें बदलाव करता है।