भारतीय मूल के बैरिस्टर ने डिग्री को लेकर झूठ बोलने पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अपील में जीत हासिल की

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भारतीय मूल के बैरिस्टर ने डिग्री को लेकर झूठ बोलने पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अपील में जीत हासिल की

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 10:48 AM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 10:48 AM IST

लंदन, दो जुलाई (भाषा) भारतीय मूल के एक वकील ने ब्रिटेन में एक बैरिस्टर चैंबर को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से चिकित्सा की पढ़ाई का झूठा दावा कर गुमराह करने के आरोप में अपने कानूनी पेशे पर लगाये गये प्रतिबंध के खिलाफ उच्च न्यायालय में दायर मुकदमे में जीत हासिल की।

अनुराग मोहिंद्रू (51) पर ब्रिटेन के बार स्टैंडर्ड्स बोर्ड ने बेईमानी और पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला आचरण करने का आरोप लगाया था और पिछले वर्ष एक स्वतंत्र न्यायाधिकरण ने पेशेवर कदाचार का दोषी मानते हुए उनके वकालत करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हालांकि, बाद में उच्च न्यायालय ने इस प्रतिबंध को रद्द कर दिया और उनकी सजा को घटाकर निलंबन में बदल दिया, जिसकी अवधि मंगलवार को समाप्त हो गई।

इसके साथ ही मोहिंद्रू के लिए फिर से बैरिस्टर के रूप में काम करने का रास्ता साफ हो गया है।

अदालती खबरों के अनुसार, न्यायमूर्ति जॉनसन ने कहा, “जनता इस अंतर को समझने में सक्षम है कि एक ऐसा पेशेवर, जिसने हाल ही में बेईमानी की हो या जिसकी बेईमानी लगातार जारी रहने वाले व्यवहार का हिस्सा हो और दूसरा ऐसा व्यक्ति, जिसका कदाचार कई वर्ष पहले हुआ हो, जिसकी पुनरावृत्ति न हुई हो और जिसके बाद के आचरण में लंबे समय तक ईमानदारी का परिचय दिया गया हो।”

उन्होंने कहा, “ऐसे मामलों में बिना उस पेशेवर को हमेशा के लिए उसके पेशे से बाहर किए भी बेईमानी की गंभीरता को रेखांकित करने वाली सजा देकर जनता का विश्वास बनाए रखा जा सकता है।”

बार स्टैंडर्ड्स बोर्ड (बीएसबी) के अभिलेखों में अद्यतन की गई प्रविष्टि में अब मोहिंद्रू के बारे में कहा गया कि वह सात अक्टूबर 2025 से 30 जून 2026 तक वकालत करने से निलंबित रहे।

बीएसबी के अनुसार, “उन्होंने (मोहिंद्रू ने) जानबूझकर चैंबर्स के उन सदस्यों को यह कहकर गुमराह किया या गुमराह करने का प्रयास किया कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल साइंस या मेडिसिन की पढ़ाई की थी, जबकि वह जानते थे कि यह दावा असत्य है। वह जानते थे कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन नहीं किया था।”

बीएसबी ने उल्लेख किया कि यह 13 वर्ष से अधिक पुराना मामला है।

मोहिंद्रू को वर्ष 2004 में लंदन के मिडिल टेंपल इन द्वारा इंग्लैंड और वेल्स के बार में शामिल किया गया था।

उन्हें वरिष्ठ कानूनी पेशेवर के रूप में किंग्स काउंसिल (केसी) की उपाधि हासिल है।

भाषा जितेंद्र वैभव

वैभव