(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, पांच जुलाई (भाषा) अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक प्रवासी भारतीय संगठन ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद से लेकर महात्मा गांधी तक और बी. के. एस. अयंगर से लेकर बी. आर. आंबेडकर तक भारतीय विचारकों और आध्यात्मिक नेताओं ने अमेरिका पर अमिट छाप छोड़ी है।
गैर-लाभकारी संगठन ‘इंडियास्पोरा’ ने अमेरिका के इतिहास को आकार देने में भारतीय उपमहाद्वीप की आध्यात्मिक शिक्षाओं के प्रसार समेत भारतीय मूल के लोगों के योगदान को रेखांकित करने वाला एक संकलन तैयार किया है।
‘250 एट 250: मोमेंट्स ऑफ द इंडियन अमेरिकन स्टोरी’ शीर्षक वाले इस संकलन में अमेरिका में हिंदू दर्शन के प्रसार में स्वामी विवेकानंद और परमहंस योगानंद से लेकर दीपक चोपड़ा एवं राजन जेड जैसे आधुनिक दौर के गुरुओं तक के योगदान का उल्लेख किया गया है।
संकलन में कहा गया है कि स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में धार्मिक सहिष्णुता एवं सार्वभौमिक स्वीकार्यता का आह्वान कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था। यह पहला अवसर था, जब किसी हिंदू संन्यासी ने अमेरिका में इतने बड़े पश्चिमी जनसमूह को संबोधित किया था। इसके बाद उन्होंने 1894 में न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी की स्थापना में मदद की जो अमेरिका में शुरुआती स्थायी हिंदू संस्थानों में से एक है।
बी. के. एस. अयंगर ने 1950 के दशक में योग को शारीरिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य की अनुशासित पद्धति के रूप में प्रस्तुत करके अमेरिका में इसके स्वरूप को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंडियास्पोरा के संस्थापक एम. आर. रंगास्वामी ने कहा, ‘‘आज अमेरिका की करीब 10 प्रतिशत आबादी योग करती है और देश में लगभग 36,000 योग स्टूडियो हैं।’’
अमेरिका का पहला हिंदू मंदिर 1905 में सैन फ्रांसिस्को में खुला और इसके बाद 1912 में स्टॉकटन का गुरुद्वारा साहिब स्थापित हुआ।
परमहंस योगानंद 1920 में स्थायी रूप से अमेरिका में बस गए। परमहंस योगानंद का प्रभाव 1927 में ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) तक पहुंचा और तत्कालीन राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज ने उन्हें व्यक्तिगत मुलाकात के लिए आमंत्रित किया।
इंडियास्पोरा के संकलन के अनुसार, उनकी पुस्तक ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ अमेरिका में पूर्वी आध्यात्मिकता पर सबसे प्रभावशाली पुस्तकों में से एक बनी।
संकलन में कहा गया है कि अविभाजित भारत में 1872 में जन्मे मुफ्ती मोहम्मद सादिक ने 1921 में शिकागो में ‘द मोस्लेम सनराइज’ की स्थापना कर अमेरिका में इस्लाम की पहुंच का विस्तार किया।
संकलन के अनुसार, ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में न्यूयॉर्क शहर में ‘इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस’ की स्थापना की और अमेरिका में गौड़ीय वैष्णव परंपरा का परिचय कराया।
बी. आर. आंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने से प्रेरित होकर दलित प्रवासियों ने अमेरिका में ऐसे बौद्ध समुदाय स्थापित किए जिन्होंने आध्यात्मिक साधना को सामाजिक न्याय और जाति-विरोधी अभियान से जोड़ा। इसके परिणामस्वरूप 2008 में ‘आंबेडकर एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ की स्थापना हुई।
भारतीय अमेरिकी, अमेरिका में सबसे तेजी से बढ़ रहे प्रमुख प्रवासी समुदायों में से एक हैं। इंडियास्पोरा के अनुसार, अमेरिका में जन्मे या वहां जाकर बसे भारतीय मूल के लोगों की संख्या 51 लाख है।
इंडियास्पोरा की प्रबंध निदेशक निरंजना राजगोपाल ने दो जुलाई को संकलन जारी होने पर ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘यह संकलन अमेरिकी जीवन के 15 क्षेत्रों को समेटता है। इसे व्यापक शोध और संपादकीय प्रक्रिया के जरिए तैयार किया गया है तथा अंतिम चयन की पुष्टि के लिए बाहरी विशेषज्ञों की भी मदद ली गई।’’
भाषा सिम्मी रंजन
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