विश्व कप के बहाने निगरानी व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंची

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विश्व कप के बहाने निगरानी व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंची

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  • Publish Date - July 5, 2026 / 03:19 PM IST,
    Updated On - July 5, 2026 / 03:19 PM IST

(ऐन टूमी मैककेना, पेन स्टेट)

पेन्सिलवेनिया (अमेरिका), पांच जुलाई (द कन्वरसेशन) इस बार का फीफा विश्व (2026) कप इतिहास का सबसे बड़ा खेल आयोजन है और लेकिन यह अब तक का सबसे अधिक निगरानी वाला विश्व कप भी माना जा रहा है। यदि आप मेजबान शहरों की यात्रा कर रहे हैं या वहां घूम रहे हैं, तो आपकी पहचान, चेहरा, गतिविधियां, आवाजाही और यहां तक कि आपके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों की नजर हो सकती है।

विश्व कप की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सरकार ने एक अरब डॉलर से अधिक की राशि खर्च की है। इस धन का उपयोग परिवहन स्थलों, स्टेडियम और उनके आसपास के इलाकों की सुरक्षा मजबूत करने, बम निरोधक दस्तों और विशेष हथियार एवं रणनीति (स्वाट) टीम जैसी सामरिक इकाइयों को सशक्त बनाने तथा आधुनिक उपकरण खरीदने और मौजूदा संसाधनों को उन्नत करने में किया गया है। इस बड़े निवेश से निजी सुरक्षा और निगरानी तकनीक से जुड़ी कंपनियों को भी व्यापक लाभ मिला है।

निगरानी संबंधी इस निवेश का बड़ा हिस्सा अनधिकृत ड्रोन के इस्तेमाल से पैदा होने वाले संभावित खतरों को रोकने के नाम पर किया गया है। निस्संदेह, यह खतरा वास्तविक है, लेकिन इसके समाधान के लिए सरकार और निजी कंपनियों के बीच निगरानी तकनीक के विकास और खरीद में तेजी से बढ़ती साझेदारी निजता के अधिकार पर खतरे की चिंता भी पैदा करती है।

मैं एक वकील, लेखक और शिक्षक के रूप में कई दशकों से निजता और निगरानी के विषय पर काम करता रहा हूं। मैंने ड्रोन के उपयोग को लेकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी सलाह दी है और यह समझता हूं कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। लेकिन सुरक्षा के नाम पर अक्सर सरकार की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है, नयी प्रौद्योगिकी विकसित की जाती है और ऐसी व्यवस्थाएं बनाई जाती हैं जो नागरिक स्वतंत्रताओं को कमजोर करती हैं, अभिव्यक्ति की आजादी पर असर डालती हैं।

मेरे अनुभव में, एक बार निगरानी को बढ़ावा देने वाली नीतियां और प्रौद्योगिकी प्रणालियां लागू हो जाएं, तो उन्हें वापस लेना शायद ही कभी संभव होता है।

कैमरे, ड्रोन और कृत्रिम मेधा

विश्व कप के दौरान निगरानी के इस अभूतपूर्व स्तर और अमेरिका के कानूनों तथा आव्रजन नीतियों में हाल के बदलावों को देखते हुए ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ और ‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ (एसीएलयू) समेत 120 से अधिक नागरिक अधिकार संगठनों ने यात्रियों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका आने वाले लोगों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, जो देश की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संबंधी कानूनी जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं हैं।

इस परामर्श में सोशल मीडिया की गहन जांच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तलाशी, नस्लीय आधार पर पहचान और जांच, गिरफ्तारी, हिरासत, निर्वासन और यहां तक कि जान का खतरा जैसे संभावित जोखिमों का उल्लेख किया गया है। कई यूरोपीय देशों ने भी अपने नागरिकों को निगरानी और जांच को लेकर यात्रा संबंधी चेतावनियां जारी की हैं।

विश्व कप के दौरान कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मेजबान शहरों के स्टेडियम में चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे लगाए गए हैं, जो स्टेडियम के भीतर और आसपास मौजूद लोगों के चेहरे संबंधी जैविक आंकड़ों (फेशियल बायोमेट्रिक्स) को एकत्र और उनका विश्लेषण कर सकते हैं। इन आंकड़ों को भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है, जबकि जिन लोगों के बायोमेट्रिक आंकड़े एकत्र किए गए हैं, उनका इस बात पर कोई नियंत्रण नहीं होगा कि बाद में उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाए।

बड़े आयोजनों में चेहरे की पहचान करने वाली प्रौद्योगिकी का बढ़ता उपयोग इस वैश्विक प्रवृत्ति का संकेत है, जिसमें शहरों में बायोमेट्रिक निगरानी को धीरे-धीरे सामान्य बनाया जा रहा है।

ड्रोन निगरानी का तेजी से विस्तार

न्यूयॉर्क जैसे कई प्रांतों ने विश्व कप सुरक्षा के लिए मिले संघीय धन का उपयोग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के ड्रोन की संख्या बढ़ाने, उनकी प्रौद्योगिकी दक्षता मजबूत करने और उनके इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने में किया है।

ड्रोन अत्यंत सक्षम और शक्तिशाली निगरानी उपकरण हैं। इनमें आसानी से कैमरे, माइक्रोफोन, उन्नत सेंसर और यहां तक कि हथियार भी लगाए जा सकते हैं।

कृत्रिम मेधा से संचालित स्वायत्त सॉफ्टवेयर ड्रोन को किसी क्षेत्र की लगातार निगरानी करने, लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया जानकारी जुटाने में सक्षम बनाते हैं। कुछ ड्रोन इतने शक्तिशाली हैं कि वे पूरे शहर को स्कैन कर सकते हैं या लगभग 18,300 मीटर (60,000 फुट) की ऊंचाई से छोटे से छोटे शब्द तक पढ़ सकते हैं।

कुछ ड्रोन ऐसी प्रौद्योगिकी से लैस होते हैं, जो उन्हें मोबाइल फोन टावर की तरह काम करने में सक्षम बनाते हैं। इसके जरिए कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी व्यक्ति की लोकेशन का पता लगा सकती हैं या उसके संदेश और फोन कॉल तक की निगरानी कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में पूरे शहर में फैले ड्रोन नेटवर्क सामान्य व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं।

जमीन पर भी बढ़ रही है निगरानी

सिर्फ आसमान ही नहीं, जमीन पर भी निगरानी तेजी से बढ़ रही है। डलास और न्यू जर्सी में कैमरों से लैस रोबोट कुत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, सिएटल के मेयर ने एक बड़े ‘क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन’ (सीसीटीवी) नेटवर्क को फिर से शुरू करने और उसका विस्तार करने का फैसला किया है, जिसे पहले बायोमेट्रिक निजता संबंधी चिंताओं के कारण बंद कर दिया गया था।

हालांकि सिएटल के मेयर का कहना है कि निगरानी से जुड़े आंकड़ों की सुरक्षा के लिए नीतियों को और मजबूत किया जा रहा है, लेकिन विश्व कप सुरक्षा के लिए मिले संघीय धन की मदद से कई प्रांत और शहर तेजी से अपने सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क के ‘टाइम्स स्क्वायर’ और वॉशिंगटन के ‘नेशनल मॉल’ में जैसे कुछ प्रमुख महानगरों और पर्यटन स्थलों पर सीसीटीवी प्रणाली कई दशक पहले स्थापित की गई थी। लेकिन अब ये प्रणालियां कहीं अधिक बड़े क्षेत्रों को कवर करती हैं।

कृत्रिम मेधा, डेटा विश्लेषण और थर्मल इमेजिंग जैसी प्रौद्योगिकी के विकास से इन कैमरों के जरिए पहले की तुलना में कहीं अधिक जानकारी जुटाई जा सकती है। आधुनिक सीसीटीवी प्रणाली अब वस्तुओं, व्यक्तियों और यहां तक कि लोगों के व्यवहार की पहचान कर उनका वर्गीकरण भी कर सकती है।

अमेरिका की यात्रा और निजता से जुड़े जोखिम

सरकारी एजेंसियों द्वारा एआई आधारित निगरानी उपकरणों का बढ़ता उपयोग निजता संबंधी जोखिम का केवल एक पहलू है। अमेरिका में व्यापक डेटा गोपनीयता कानूनों का अभाव और आव्रजन तथा लैंगिक पहचान से जुड़े कानूनों एवं शासकीय आदेशों में हुए बदलाव भी अमेरिका की यात्रा को सुरक्षा और निजता, दोनों दृष्टि से अधिक संवेदनशील बनाते हैं।

आठ सितंबर, 2025 को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने एक ऐसा फैसला दिया, जिसके बारे में आलोचकों का कहना है कि इससे आव्रजन कानून लागू करने के दौरान नस्लीय आधार पर पहचान और जांच की गुंजाइश बढ़ गई है।

इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी, 2025 को एक शासकीय आदेश जारी किया, जिसके तहत संघीय एजेंसियां पहचान पत्रों में केवल पुरुष और महिला—इन दो ही लैंगिक पहचान को मान्यता देंगी।

जर्मनी सहित कई यूरोपीय देशों ने अपने ट्रांसजेंडर नागरिकों को चेताया है कि इस निर्देश के कारण उन्हें अमेरिका में प्रवेश से वंचित किया जा सकता है।

इन सभी बदलावों का असर यात्रा की प्रक्रिया, दस्तावेजों की आवश्यकताओं और सीमा पार करने की औपचारिकताओं पर पड़ रहा है।

विश्व कप खत्म होने के बाद क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्व कप समाप्त होने और पर्यटकों के लौट जाने के बाद इन निगरानी प्रणालियों का क्या होगा।

सरकार और निजी कंपनियों की साझेदारी के जरिए संघीय धन से विकसित इन निगरानी प्रणालियों पर प्रभावी निगरानी या स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा बहुत सीमित है। आम लोगों के लिए यह जानना कठिन है कि कौन-सा डेटा एकत्र किया जा रहा है, उसका उपयोग किस तरह हो रहा है, वह किन संस्थाओं के साथ साझा किया जा रहा है, उसका विश्लेषण कैसे किया जा रहा है और आयोजन के समाप्त होने के बाद इन प्रणालियों, साझेदारियों तथा डेटा का भविष्य क्या होगा।

डेटा गोपनीयता और कृत्रिम मेधा आधारित प्रणालियों के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करने तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संघीय, प्रांतीय और स्थानीय स्तर के जनप्रतिधियों के पास यह महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, शोधकर्ता का मानना है कि अब तक इस दिशा में हुए प्रयास भविष्य के लिए बहुत उत्साहजनक संकेत नहीं देते।

द कन्वरसेशन खारी रंजन

रंजन