(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 30 जून (भाषा) पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इसहाक डार ने मंगलवार को कहा कि उनका देश सिंधु जल संधि स्थगित करने के भारत के फ़ैसले को खारिज करता है और यह ‘‘अब भी वैध, बाध्यकारी और प्रभावी है।’’
भारत ने पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान के साथ 1960 की संधि को निलंबित कर दिया था। यह कदम फरवरी में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में उठाया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।
‘रेडियो पाकिस्तान’ की खबर के अनुसार, इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डार ने दावा किया कि ‘‘कोई भी पक्ष एकतरफा तौर पर ऐसी संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता, जिसमें ऐसा कोई प्रावधान न हो।’’
उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि केवल पानी के बंटवारे की व्यवस्था नहीं है, बल्कि ‘‘क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सहयोग का एक अहम साधन’’ है।
मंत्री ने कहा कि साझा जल-संसाधन ‘‘सहयोग, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के आधार पर देशों के बीच एक सेतु बने रहने चाहिए, ताकि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों का भला हो सके।’’
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को ‘‘सही तौर पर आवंटित’’ पानी से वंचित करने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर ‘‘गंभीर परिणाम’’ होंगे।
सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। सीमा-पार बहने वाली नदियों से जुड़े मुद्दों के समाधान और प्रबंधन के उद्देश्य से यह समझौता नौ वर्षों की लंबी वार्ताओं के बाद अस्तित्व में आया था।
‘सिंधु जल संधि : शांति और क्षेत्रीय स्थिरता का प्रमुख माध्यम’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि सिंधु नदी सौदेबाजी या बातचीत का विषय नहीं है।
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री जरदारी ने जलमार्गों के ‘‘हथियार के रूप में इस्तेमाल’’ के खिलाफ एक नए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जलमार्गों का इस्तेमाल किसी देश पर दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता और यह सिद्धांत पूरी दुनिया में लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य, स्वेज नहर, पनामा नहर, नील नदी, टिगरिस नदी, यूफ्रेटिस नदी और सिंधु नदी जैसे सभी प्रमुख जलमार्ग शामिल होने चाहिए।
जरदारी ने सिंधु नदी के रणनीतिक महत्व की तुलना हॉर्मुज जलडमरूमध्य से करते हुए कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने की स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित नहीं हो सकती, तो सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) की बहाली के बिना भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी संघर्षविराम लंबे समय तक कैसे कायम रह सकता है?
भाषा अमित सुरेश
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