ईरान के विदेश मंत्री की अमेरिका को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी, प्रदर्शनों के बीच बढ़ा तनाव

ईरान के विदेश मंत्री की अमेरिका को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी, प्रदर्शनों के बीच बढ़ा तनाव

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  • Publish Date - January 21, 2026 / 12:26 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 12:26 PM IST

दुबई, 21 जनवरी (एपी) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को अमेरिका के खिलाफ अब तक की सबसे सीधी और कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि इस्लामिक गणराज्य पर दोबारा हमला हुआ तो वह “अपने पास मौजूद हर ताकत से जवाब देगा।”

तेहरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के निर्ममतापूर्वक दमन के बाद बढ़ते तनाव के बीच अराघची ने यह बात कही है। इस दमन के चलते दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में उन्हें दिया गया निमंत्रण रद्द कर दिया गया।

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त हुआ है, जब अमेरिका के लड़ाकू विमान उपकरणों के साथ एशिया से पश्चिम एशिया की दिशा में बढ़ रहे हैं। वहीं, कैरिबियाई क्षेत्र में अमेरिका की एक बड़ी सैन्य तैनाती के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बीच, पश्चिम एशिया में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों की गतिविधियां भी बढ़ती दिख रही हैं।

अराघची ने यह चेतावनी ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में प्रकाशित एक लेख में दी। लेख में उन्होंने दावा किया कि “अशांति का हिंसक चरण 72 घंटे से भी कम समय तक चला।”

उन्होंने एक बार फिर हिंसा के लिए सशस्त्र प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इंटरनेट बंद होने के बावजूद ईरान से सामने आए वीडियो में सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बार-बार गोलीबारी करते हुए देखा जा सकता है, जिसका अराघची ने अपने लेख में कोई उल्लेख नहीं किया।

उन्होंने लिखा, “जून 2025 में ईरान ने जिस संयम का परिचय दिया था, लेकिन यदि हम पर दोबारा हमला हुआ तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाओं को इस बार हर ताकत से जवाब देने में कोई संकोच नहीं होगा।”

वह जून में इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए 12 दिन के युद्ध का संदर्भ दे रहे थे। उन्होंने कहा, “यह कोई धमकी नहीं है, बल्कि एक वास्तविकता है, जिसे मैं स्पष्ट रूप से बताना जरूरी समझता हूं, क्योंकि एक राजनयिक और एक पूर्व सैनिक के रूप में मैं युद्ध से घृणा करता हूं।”

अराघची ने चेतावनी दी कि यह टकराव बेहद भीषण होगा और इजराइल तथा उसके छद्म सहयोगियों द्वारा व्हाइट हाउस को दिखाई जा रही काल्पनिक समय-सीमाओं से कहीं अधिक लंबा चलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह निश्चित रूप से पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा और दुनिया भर के आम लोगों पर इसका असर पड़ेगा।”

इस बीच, पश्चिम एशिया के देशों, खासकर खाड़ी अरब देशों के राजनयिकों ने अमेरिका से ईरान पर हमला न करने की अपील की है। पिछले सप्ताह ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिसे संभावित हमले की आशंका से जोड़कर देखा गया।

जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में दक्षिण चीन सागर में मौजूद अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन मंगलवार तक मलक्का जलडमरूमध्य से गुजर चुका था, जो दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है।

अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि विमानवाहक पोत और उसके साथ मौजूद तीन विध्वंसक जहाज पश्चिम की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, नौसेना और रक्षा अधिकारियों ने यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि यह समूह पश्चिम एशिया की ओर जा रहा है, लेकिन हिंद महासागर में इसकी मौजूदा स्थिति से संकेत मिलता है कि यह कुछ ही दिनों में क्षेत्र में पहुंच सकता है।

अमेरिका स्थित ‘‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’’ के अनुसार, प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या कम से कम 4,519 तक पहुंच गई है। एजेंसी ने कहा कि वह ईरान के भीतर कार्यरत कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए मौतों की पुष्टि करती है और वर्षों से उसके आंकड़े सटीक रहे हैं। हालांकि, एसोसिएटेड प्रेस इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है।

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक 26,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों की टिप्पणियों से इस बात की आशंका जताई जा रही है कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को मौत की सजा दी जा सकती है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और संभावित फांसी का जिक्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच किया है।

एपी मनीषा वैभव

वैभव