लंदन, 26 जून (एपी) ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय बकिंघम पैलेस के 10 वर्षों तक 36.9 करोड़ पाउंड (लगभग 48.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर) के व्यापक नवीनीकरण कार्यक्रम के पूरा होने के बाद भी वहां स्थायी रूप से नहीं रहेंगे।
राजशाही का मानना है कि इस ऐतिहासिक भवन को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाया जाना चाहिए।
हालांकि, शाही अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि महाराजा चार्ल्स और महारानी कैमिला बकिंघम पैलेस से अपने आधिकारिक कार्य करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यह महल आगे भी राजशाही का ‘‘औपचारिक और प्रशासनिक केंद्र’’ बना रहेगा, लेकिन चार्ल्स के पूरे शासनकाल के दौरान महाराजा और महारानी (बकिंघम पैलेस के) निकट स्थित क्लेरेंस हाउस में निवास करेंगे।
महाराजा के वित्तीय मामलों की देखरेख करने वाले वरिष्ठ शाही अधिकारी जेम्स चाल्मर्स ने कहा, ‘‘बकिंघम पैलेस राजशाही का मुख्यालय है और आगे भी बना रहेगा। यह हमारे राष्ट्रीय भवनों का सबसे अनमोल रत्न है।’’
इस निर्णय की घोषणा बृहस्पतिवार को शाही वित्तीय मामलों पर आयोजित एक ब्रीफिंग के दौरान की गई। इसी अवसर पर किंग चार्ल्स देश के पहले ऐसे सम्राट भी बने, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से यह जानकारी दी कि उन्होंने सरकार को कितना कर अदा किया।
वित्त वर्ष 2024-25 में किंग चार्ल्स ने आयकर और पूंजीगत लाभ कर के रूप में 1.29 करोड़ पाउंड (करीब 1.61 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का भुगतान किया, जबकि पिछले वर्ष उन्होंने 1.17 करोड़ पाउंड कर चुकाया था।
ये घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं, जब ब्रिटिश शाही परिवार हाल के महीनों में लगातार सुर्खियों में रही उन खबरों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है, जिनमें दोषी करार दिए जा चुके यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन और पूर्व शहजादे प्रिंस एंड्रयू (अब एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर) के संबंधों का उल्लेख किया गया था।
प्रिंस एंड्रयू से जुड़े विवादों ने किंग चार्ल्स के उन प्रयासों पर असर डाला है, जिनके तहत वह एक हजार वर्ष पुरानी ब्रिटिश राजशाही को आधुनिक और समयानुकूल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
दो सदियों से ब्रिटिश राजशाही का प्रतीक है बकिंघम पैलेस। 1820 के दशक में निर्मित बकिंघम पैलेस महारानी विक्टोरिया के समय से प्रत्येक ब्रिटिश सम्राट का लंदन स्थित आधिकारिक निवास रहा है।
सात सौ 75 कमरों वाले इस महल में शाही प्रशासन के कार्यालय भी हैं और यहां विदेशी राष्ट्रपतियों, सम्राटों तथा अन्य विशिष्ट मेहमानों के सम्मान में भव्य राजकीय भोज आयोजित किए जाते हैं।
बकिंघम पैलेस आम जनता के लिए भी विशेष महत्व रखता है। महल की बालकनी से राजा और रानी युद्धों की समाप्ति की घोषणा करते रहे हैं, अपने विवाह का जश्न मनाते रहे हैं और महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के 70 वर्ष के शासनकाल जैसे ऐतिहासिक अवसरों को जनता के साथ साझा करते रहे हैं। इसी महल के सामने स्थित ‘द मॉल’ नामक भव्य मार्ग पर शाही परेड भी आयोजित होती हैं।
लगातार उपयोग के कारण महल की संरचना पुरानी होने लगी थी। इसी वजह से 2017 में शाही परिवार ने 10 वर्षीय नवीनीकरण परियोजना शुरू की, जिसके तहत पुरानी जलापूर्ति, विद्युत और हीटिंग प्रणालियों को आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि यह भवन अगले 50 वर्षों तक सुरक्षित और उपयोगी बना रहे। यह परियोजना अगले वर्ष पूरी होने की उम्मीद है।
हालांकि, नवीनीकरण पूरा होने के बाद भी महाराजा चार्ल्स और महारानी कैमिला ने क्लेरेंस हाउस में ही रहने का निर्णय लिया है। चार्ल्स वेल्स के राजकुमार रहने के समय से ही इस भवन में रहते आए हैं।
जेम्स चाल्मर्स ने कहा कि इस निर्णय से बकिंघम पैलेस को आम जनता के लिए पहले से अधिक खोला जा सकेगा। यहां अधिक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ाई जाएगी और महल के भ्रमण (टूर) का दायरा भी विस्तृत किया जाएगा। वर्तमान में हर वर्ष लगभग सात लाख लोग बकिंघम पैलेस का भ्रमण करते हैं।
शाही मामलों के जानकार अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि बकिंघम पैलेस के भविष्य को लेकर क्या नई योजनाएं सामने आती हैं।
‘आफ्टर एलिज़ाबेथ: कैन द मॉनार्की सेव इटसेल्फ’ के लेखक एड ओवेन्स का कहना है कि यदि इतना विशाल भवन वर्ष के अधिकांश समय खाली पड़ा रहे, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे उम्मीद है कि इस फैसले का दूसरा चरण भी सामने आएगा। मैं यह देखना चाहता हूं कि भविष्य में बकिंघम पैलेस की भूमिका को लेकर कोई और अधिक व्यापक और दूरगामी प्रस्ताव सामने आता है या नहीं।’’
शाही परिवार अब यह भी स्वीकार कर रहा है कि आधुनिक दौर में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए अधिक पारदर्शिता आवश्यक है। यही कारण है कि किंग चार्ल्स ने पहली बार अपने द्वारा अदा किए गए करों का सार्वजनिक खुलासा किया है और शाही वित्तीय मामलों को अधिक खुला और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
एपी शोभना रंजन
रंजन