चंद्रमा पर स्थायी ठिकाने की दिशा में नासा का बड़ा कदम, तीन चरणों की योजना पेश

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चंद्रमा पर स्थायी ठिकाने की दिशा में नासा का बड़ा कदम, तीन चरणों की योजना पेश

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 08:53 AM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 08:53 AM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 27 मई (भाषा) चंद्रमा की सफल परिक्रमा के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रमा पर स्थायी ठिकाना स्थापित करने की दिशा में तीन नए मिशन की घोषणा की है।

नासा प्रशासक जारेड आइजैकमैन ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में चंद्रमा पर स्थायी आधार (बेस) स्थापित करने के लिए 20 अरब अमेरिकी डॉलर की योजना की घोषणा की। इस बेस में लूनर रोवर और ड्रोन तैनात किए जाएंगे, जिनकी मदद से ऐसे प्रयोग किए जाएंगे जो खतरनाक अंतरिक्षीय वातावरण में रहने और काम करने की तकनीक विकसित करने में सहायक होंगे।

आइजैकमैन ने कहा, ‘‘अमेरिका चंद्रमा पर लौट रहा है। चंद्रमा बेस, किसी अन्य खगोलीय दुनिया पर अमेरिका और मानवता की पहली स्थायी चौकी होगा।’’

नासा ने मार्च में चंद्रमा पर बेस स्थापित करने का लक्ष्य घोषित किया था और मंगलवार को इसके लिए ठोस कदमों की जानकारी दी। एजेंसी का लक्ष्य 2028 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारना है।

नासा ने बताया कि उसने ‘मून बेस-1’ मिशन के लिए ब्लू ऑरिजिन के ‘ब्लू मून मार्क-1 एंड्योरेंस’ लैंडर का चयन किया है। यह मिशन ‘स्टीरियो कैमरा फॉर लूनर प्लूम-सर्फेस स्टडीज’ और ‘लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टिव एरे’ जैसे उपकरण चंद्रमा तक पहुंचाएगा, जिनसे यह अध्ययन किया जाएगा कि लैंडर के थ्रस्टर चंद्रमा की सतह के साथ कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। यह मिशन सितंबर के बाद प्रस्तावित है।

यह मिशन ‘शैकलटन कनेक्टिंग रिज’ क्षेत्र में उतरेगा और 2028 में प्रस्तावित मानवयुक्त ‘आर्टेमिस’ मिशनों के जोखिम को कम करने वाली तकनीकों का प्रदर्शन करेगा।

अप्रैल में चार अंतरिक्ष यात्री आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चंद्रमा की परिक्रमा कर चुके हैं। यह 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसने निचली पृथ्वी कक्षा से आगे यात्रा की। जीन सर्नन और हैरिसन श्मिट 1972 में चंद्रमा पर चहलकदमी करने वाले अंतिम अंतरिक्ष यात्री थे।

इस वर्ष के अंत में प्रस्तावित ‘मून बेस-2’ मिशन एस्ट्रोबायोटिक के ‘ग्रिफिन’ लैंडर के जरिए 1,100 पाउंड से अधिक सामान चंद्रमा तक पहुंचाएगा।

वहीं, ‘मून बेस-3’ मिशन चंद्रमा पर मौजूद रहस्यमयी चमकीले घुमावदार निशानों यानी ‘लूनर स्वर्ल्स’ का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चंद्रमा की सतह के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है। इस मिशन में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कोरियाई अंतरिक्ष एजेंसी के पेलोड भी शामिल होंगे।

तीन चरणों वाले इस कार्यक्रम के तहत नासा अगले तीन वर्षों में नयी तकनीकों का परीक्षण करेगा और चंद्रमा की सतह पर संचालन की तैयारी करेगा। एजेंसी 2028 में प्रस्तावित आर्टेमिस-3 मिशन के लिए चंद्रमा की सतह पर चलने वाला कम से कम यान भी उपलब्ध कराना चाहती है।

मून बेस का दूसरा चरण 2029 से 2032 तक चलेगा, जिसमें बिजली ग्रिड समेत स्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। 2032 और उसके बाद के लिए प्रस्तावित तीसरे चरण में नियमित अंतरिक्ष यात्री दलों की अदला-बदली और सतत गतिविधियों के जरिए चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

नासा के मून बेस कार्यक्रम के कार्यकारी कार्लोस गार्सिया-गलान ने कहा, ‘‘तब हम कह सकेंगे कि हम यहां स्थायी रूप से मौजूद हैं और अब इसे छोड़ने वाले नहीं हैं।’’

भाषा गोला खारी

खारी