(शिरीष बी. प्रधान)
काठमांडू, आठ मार्च (भाषा) नेपाल में पिछले साल सितंबर में ‘जेन जेड’ के प्रदर्शनों के दौरान हुई हत्याओं, आगजनी और तोड़फोड़ की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय आयोग ने रविवार को अपनी रिपोर्ट अंतरिम सरकार को सौंप दी।
रिपोर्ट में तत्कालीन प्रशासन के कुप्रबंधन और अक्षमता को दोषी ठहराया गया है।
सिंह दरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को जांच रिपोर्ट सौंपी गई, हालांकि आयोग प्रमुख और सरकार दोनों ने ही ‘जेन जेड’ के प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम और अन्य संबंधित मुद्दों का खुलासा नहीं किया।
दो दिवसीय प्रदर्शन के दौरान कुल 76 लोग मारे गए थे, जिनमें आठ सितंबर को 22 युवक और अगले दिन 54 अन्य लोगों की मौत हुई थी।
सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के एक सप्ताह बाद 21 सितंबर को मंत्रिमंडल के एक निर्णय के परिणामस्वरूप, सितंबर में हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित घटनाओं की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया।
आयोग के अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की ने कहा कि यह घटना मुख्य रूप से तत्कालीन सरकार के कुशासन और अक्षमता के कारण घटी। उन्होंने कहा कि नौकरशाही और न्यायिक निकायों सहित सरकारी संस्थानों के राजनीतिकरण से लोग हताश थे।
आयोग के अध्यक्ष कार्की ने रिपोर्ट सौंपने के बाद मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘जेन जेड के प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर गोली चलाने और आदेश जारी करने वालों के साथ-साथ हत्याओं को रोकने के लिए कार्रवाई न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।’’
उन्होंने अन्य विवरण नहीं दिए।
कार्की ने कहा कि आयोग ने ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाते हुए रिपोर्ट तैयार की और जांच के दौरान प्राप्त सभी तथ्यों को बिना किसी पूर्वाग्रह के रिपोर्ट में शामिल किया।
उन्होंने कहा, “अब सिफारिशों को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है।”
आयोग के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अगर सरकार इन्हें लागू करने में विफल रहती है, तो देश में एक और ‘जेन जेड’ आंदोलन हो सकता है।
‘जेनरेशन जेड’ 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है।
भाषा जितेंद्र शफीक
शफीक