काठमांडू, 29 अगस्त (भाषा) नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद के लिए भारत की 11 सदस्यीय तकनीकी टीम ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
शुक्रवार को काठमांडू पहुंची इस टीम में चिकित्सक, चिकित्सा सहायक और अभियंता शामिल थे।
यह टीम शनिवार को नुवाकोट जिले के त्रिशूली पहुंची, ताकि एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के प्रयासों में मदद की जा सके।
भारतीय दूतावास ने शनिवार को काठमांडू में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज भारत की विशेषज्ञ तकनीकी टीम ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में जलविद्युत सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया, ताकि वहां फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद की जा सके।’’
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चिलीमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण पूरा करने के बाद भारतीय टीम ने सुरंग के आसपास बचाव कार्य से जुड़े आवश्यक काम शुरू कर दिए।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने और मलबा हटाने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 82 सदस्यीय संयुक्त सुरक्षा दल ने शुक्रवार रात अभियान शुरू किया।
सुरंग के प्रवेश द्वार पर जमा मिट्टी व मलबे और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने अब तक विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया है।
नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 ‘बेली ब्रिज’ बनाने में मदद का अनुरोध किया था।
बेली ब्रिज ऐसे पुल होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश