नेपाल ने कोलकाता में बांग्लादेशी सांसद की हत्या के एक प्रमुख आरोपी को भारत को सौंपा: रिपोर्ट

नेपाल ने कोलकाता में बांग्लादेशी सांसद की हत्या के एक प्रमुख आरोपी को भारत को सौंपा: रिपोर्ट

नेपाल ने कोलकाता में बांग्लादेशी सांसद की हत्या के एक प्रमुख आरोपी को भारत को सौंपा: रिपोर्ट
Modified Date: June 7, 2024 / 05:06 pm IST
Published Date: June 7, 2024 5:06 pm IST

काठमांडू, सात जून (भाषा) नेपाल ने पिछल महीने कोलकाता में हुई बांग्लादेशी सासंद अनवारुल अजीम अनार की नृशंस हत्या के मुख्य आरोपियों में से एक को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया है। शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

एक समाचार पोर्टल ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया, ‘नेपाल पुलिस द्वारा संपर्क किए जाने के बाद सोमवार की सुबह नेपाल की इंटरपोल शाखा ने मोहम्मद सियाम हुसैन को भारतीय अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया।’

समाचार पोर्टल की खबर के अनुसार, हत्या के बाद नेपाल भाग गए हुसैन को पिछले बृहस्पतिवार को नेपाल के सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार किया गया।

बांग्लादेशी सासंद के परिचित द्वारा 18 मई को दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार 56 वर्षीय अवामी लीग के सांसद अनार 12 मई को इलाज के लिए कोलकाता गए थे लेकिन 17 मई को उनसे संपर्क नहीं हो सका।

अनार की स्थानीय न्यू टाउन इलाके के एक फ्लैट में कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर बांग्लादेशी सासंद के शव को 80 टुकड़ों में काटा और उन्हें हल्दी के साथ मिलाकर न्यू टाउन के आसपास एक नहर सहित विभिन्न स्थानों पर फेंक दिया।

संदेह है कि अनार के दोस्त और व्यापारिक साझेदार अख्तरुज्जमां ने हत्या की साजिश रची थी।

अख्तरुज्जमां अब अमेरिकी नागरिक है।

बांग्लादेश पुलिस चाहती थी कि हुसैन को उसे सौंपा जाए लेकिन उसे भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया क्योंकि वह भारत से आया था।

उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया कि आरोपी को सड़क मार्ग से भारत भेजा गया था।

नेपाल पुलिस ने कहा कि नेपाल की इंटरपोल शाखा ने हुसैन की गिरफ्तारी के संबंध में स्थानीय पुलिस को जानकारी नहीं दी है।

बांग्लादेश की ढाका पुलिस की चार सदस्यों की एक टीम हुसैन को लेने के लिए काठमांडू आई थी। टीम ने नेपाल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की और उनसे हुसैन को वापस भेजने का अनुरोध किया लेकिन उनके अनुरोध को नज़रअंदाज़ कर दिया गया क्योंकि नेपाल की ढाका के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है।

भाषा योगेश मनीषा

मनीषा


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