सीमा मुद्दे पर बालेंद्र की टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शनों के बाद नेपाल संसद की कार्यवाही स्थगित

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सीमा मुद्दे पर बालेंद्र की टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शनों के बाद नेपाल संसद की कार्यवाही स्थगित

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 08:10 PM IST

काठमांडू, दो जून (भाषा) नेपाल की संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही मंगलवार को स्थगित कर दी गई, क्योंकि सांसदों ने भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणियों के विरोध में लगातार हंगामा जारी रखा।

संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही आठ जून तक के लिए स्थगित कर दी गई, जबकि नेशनल असेंबली को बुधवार तक स्थगित किया गया। इससे पहले, सोमवार को भी संसद सत्र स्थगित किया गया था।

विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री बालेंद्र की रविवार को संसद में की गई टिप्पणी का विरोध कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि “न केवल भारत, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है”, जिससे विवाद खड़ा हो गया।

बालेंद्र ने अपने संबोधन में, विस्तार से बताए बिना, यह संकेत दिया कि भारत और नेपाल ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद से समाधान निकालने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि काठमांडू ने इस मामले को चीन और ब्रिटेन के समक्ष भी उठाया है। भारत ने हिमालयी देश के साथ सीमा विवाद के समाधान में “तीसरे पक्ष” की किसी भी प्रकार की भूमिका को मंगलवार को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।

प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणी के खिलाफ विरोध जताया।

अध्यक्ष डोल प्रसाद आर्यल ने सदस्यों से शांत रहने और सदन की कार्यवाही में सहयोग करने का आग्रह किया, लेकिन विपक्षी सांसदों ने उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया। विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री बालेंद्र के बयान को वापस लेने और उसे संसद की कार्यवाही के अभिलेख से हटाने की मांग कर रहे थे।

संसद सचिवालय के सूत्रों के अनुसार इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और अगली बैठक आठ जून को पूर्वाह्न 11 बजे के लिए निर्धारित की गई।

इसी तरह, विपक्षी सांसदों ने नेशनल असेंबली में भी विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद अध्यक्ष नारायण प्रसाद दाहाल ने बैठक स्थगित कर दी और अगली बैठक तीन जून को दोपहर 12:15 बजे बुलाने की घोषणा की।

नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से किया जाना चाहिए।

मंगलवार को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “भारत-नेपाल सीमा के करीब 98 प्रतिशत हिस्से का निर्धारण किया जा चुका है, लेकिन कुछ हिस्से अब भी अनसुलझे हैं। गंडक नदी के प्रवाह मार्ग में बदलाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।”

उन्होंने कहा, “इसके अलावा, सीमा के चिह्नित क्षेत्रों में ‘नो-मैन्स लैंड’ पर अतिक्रमण और सीमा पार कब्जे के कुछ मामले सामने आए हैं। इनका दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है।’’

भाषा अमित प्रशांत

प्रशांत

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