नेपाल के प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन व बाढ़ आपदा का मुद्दा उठाएंगे : अधिकारी

नेपाल के प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन व बाढ़ आपदा का मुद्दा उठाएंगे : अधिकारी

नेपाल के प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन व बाढ़ आपदा का मुद्दा उठाएंगे : अधिकारी
Modified Date: September 11, 2026 / 07:29 pm IST
Published Date: September 11, 2026 7:29 pm IST

(शिरिष बी प्रधान)

काठमांडू, 11 सितंबर (भाषा) नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी सत्र में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनके देश को होने वाले जानमाल के नुकसान का भी जिक्र किया जाएगा। एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि शाह 22 से 26 सितंबर तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह मार्च में पद संभालने के बाद उनका पहला विदेश दौरा होगा।

विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री शाह 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे।’’

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन के दौरान भोटेकोशी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों का मुद्दा उठाएंगे।

राय ने कहा कि अचानक आई बाढ़ की वजह से नेपाल को जो भारी क्षति हुई, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह देश ‘‘जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए संकट के केंद्र’’ में है।

उन्होंने कहा कि नेपाल जैसे देशों को कार्बन उत्सर्जन के नकारत्मक असर का सामना करना पड़ता है, जबकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उनका योगदान बहुत कम है।

राय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जलवायु परिवर्तन और इसके नतीजों के कारण नेपाल को समय-समय पर होने वाले जानमाल के भारी नुकसान की ओर वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित करेंगे।’’

विदेश सचिव ने कहा कि शाह नुकसान और क्षति से निपटने वाले कोष और जलवायु न्याय के लिए काम करने वाले अन्य संगठनों से त्वरित और उचित मुआवजा दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील भी करेंगे।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के बाद सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ के पानी को अपने साथ नीचे ले आई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। इस त्रासदी में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि 5,300 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।

भाषा धीरज पारुल

पारुल


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