पाकिस्तान: सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार, पीपीपी ने पीएमएल-एन पर बजट में छूट न देने का आरोप लगाया
पाकिस्तान: सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार, पीपीपी ने पीएमएल-एन पर बजट में छूट न देने का आरोप लगाया
इस्लामाबाद, 12 जून (भाषा) पाकिस्तान की पीएमएल (एन)-नीत सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी पीपीपी ने वार्षिक बजट की तैयारी में उसके सुझावों की अनदेखी करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए सवाल किया है कि क्या शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार अब भी उसके समर्थन को तरजीह देती है। इस विवाद के कारण पाकिस्तान की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सहयोगियों के बीच कथित तौर पर दरार पैदा हो गयी है।
‘डॉन’ अखबार ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने संसद में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश किये जाने से पहले मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी की अध्यक्षता में अपनी संसदीय समिति की बैठक में अपनी आपत्ति व्यक्त की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीपीपी ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सरकार पर वार्षिक बजट तैयार करते समय उससे (पीपीपी से) कोई सुझाव न लेने का आरोप लगाया और आश्चर्य जताया कि क्या उसे अब भी सहयोगी का समर्थन चाहिए।
पार्टी के संसदीय दल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में नेशनल असेंबली की सदस्य और पीपीपी की सूचना सचिव शाजिया मारी ने कहा कि सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं से नेतृत्व को अवगत कराया और विकास योजनाओं पर आपत्ति जताई।
पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली सरकार के व्यवहार पर पीपीपी की ओर से नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संघीय सरकार द्वारा हमारे सांसदों के प्रति अपनाया गया रवैया हमारे सदस्यों के लिए समस्याएं पैदा कर रहा है, क्योंकि वे लोगों के प्रति जवाबदेह हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बजट तैयार करने में हमारी पार्टी से कोई ‘इनपुट’ नहीं लिया गया। संघीय पीएसडीपी (सार्वजनिक क्षेत्र विकास कार्यक्रम) में भी हमारी राय नहीं ली गई। हमने ऐसी स्थिति पर रोक लगाने की कोशिश की थी और पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों ने सरकार से संपर्क किया था, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारी आवाज नहीं सुनी जाएगी।’’
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में सोमवार को राष्ट्रीय आर्थिक परिषद (एनईसी) की बैठक में संघीय पीएसडीपी में 47 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को मंजूरी दी गई, जो चालू वर्ष के 950 अरब रुपये की तुलना में 1400 अरब रुपये हो गई।
गत आठ फरवरी को हुए विवादास्पद आम चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों के बाद, पीएमएल-एन और पीपीपी ने खंडित चुनावी नतीजों के बाद गहन बातचीत के उपरांत गठबंधन सरकार बनाई थी। यह पहली बार नहीं है जब पीपीपी ने महत्वपूर्ण निर्णय लेने के दौरान पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अनदेखी किए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
पिछले सप्ताह, पीपीपी नेता सैयद खुर्शीद अहमद शाह ने अफसोस जताया कि पीएमएल-एन सरकार ने ‘न तो हमें बजट से संबंधित कुछ बताया और न ही हमें विश्वास में लिया… हमें नहीं पता कि पीएमएल-एन निजीकरण नीति, करों, विकास कार्यक्रमों के बारे में क्या कर रही है’।
शाह ने यह भी कहा कि पीपीपी को राहत के बारे में कुछ भी पता नहीं है और यह नहीं पता कि सरकार बजट बना रही है या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का बजट थोपा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पीपीपी को बजट के बारे में लिये जाने वाले निर्णयों की राजनीतिक रूप से जांच करनी होगी।
भाषा सुरेश अविनाश
अविनाश

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