भारत सिंधु जल संधि का सम्मान करे: पाकिस्तान का अनुरोध

भारत सिंधु जल संधि का सम्मान करे: पाकिस्तान का अनुरोध

भारत सिंधु जल संधि का सम्मान करे: पाकिस्तान का अनुरोध
Modified Date: May 26, 2026 / 10:31 pm IST
Published Date: May 26, 2026 10:31 pm IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 26 मई (भाषा) पाकिस्तान ने मंगलवार को भारत से सिंधु जल संधि (आईडब्लयूटी) का सम्मान करने का आग्रह किया और कहा कि संधि को स्थगित करने का कोई भी प्रयास निचले इलाकों में स्थित देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा।

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने भारत पर साझा जल संसाधनों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि सीमा पार नदियों को प्रभावित करने वाली एकतरफा कार्रवाई जल सुरक्षा, खाद्य उत्पादन और जलवायु परिवर्तन से निपटने से संबंधित गंभीर वैश्विक चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।

मंत्री ने भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तंत्रों का पालन करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि संधि को स्थगित करने का कोई भी प्रयास दुनिया भर के निचले इलाकों में स्थित देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा।

पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था।

पाकिस्तान ने भारत द्वारा संधि को निलंबित किये जाने को खारिज कर दिया और कहा कि समझौते के तहत ‘पाकिस्तान से संबंधित’ पानी के प्रवाह को रोकने के लिए उठाए गए किसी भी कदम को ‘युद्ध का कृत्य’ माना जाएगा।

विश्व बैंक की मध्यस्थता से संपन्न सिंधु जल संधि, 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है।

अपने संबोधन में मलिक ने पाकिस्तान की बढ़ती जलवायु चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वैश्विक तापमान वृद्धि से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में पाकिस्तान भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि बार-बार आने वाली बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं ने बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है, कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया है और पूरे पाकिस्तान में आजीविका को बाधित किया है।

मलिक ने हिमनदों के पिघलने और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के मुद्दे पर क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और ताजिकिस्तान में लगभग 13,000 हिमनद हैं, लेकिन बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण लगभग 1,000 हिमनद खो चुके हैं।

भाषा संतोष माधव

माधव


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