वेटिकन सिटी, पांच अप्रैल (एपी) पोप लियो 14वें ने रोमन कैथोलिक चर्च का प्रमुख बनने के बाद ईस्टर पर अपनी पहली प्रार्थना सभा में रविवार को युद्ध के खिलाफ उम्मीद बनाए रखने का आह्वान किया और कहा कि ‘‘आज दुनियाभर में हो रहे संघर्षों के बीच हमें उम्मीद बनाये रखने की जरूरत है।’’
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के दूसरे महीने भी जारी रहने तथा रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच, पोप लियो बार-बार संघर्ष विराम की अपील करते रहे हैं। अपने ईस्टर संदेश में पोप ने खास तौर पर उन लोगों की आलोचना की जो युद्ध करते हैं, कमजोरों का शोषण करते हैं और मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं।
अमेरिका में जन्मे पहले पोप ने सेंट पीटर्स स्क्वायर में खुले मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। यह मंच सफेद गुलाब के फूलों से सजा हुआ था, जबकि उस चौराहे की ओर जाने वाली सीढ़ियां, जहां श्रद्धालु एकत्र हुए थे, वसंत ऋतु के बारहमासी फूलों से भरी थीं, जो प्रतीकात्मक रूप से पोप उम्मीद भरे संदेश को दर्शा रही थीं।
पोप ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मृत्यु के सामने भी अपनी उम्मीद बनाए रखें, जो ‘‘अन्याय, पक्षपातपूर्ण स्वार्थ, गरीबों के दमन और सबसे कमजोर लोगों के प्रति उपेक्षा’’ में छिपी होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे हिंसा में देखते हैं, दुनिया के दुख और घावों में देखते हैं, और उस दर्द भरी पुकार में महसूस करते हैं जो हर जगह से उठती है क्योंकि कमजोर लोगों पर अत्याचार हो रहा है, मुनाफे के लालच में धरती के संसाधनों का दोहन किया जा रहा है और युद्ध की हिंसा लोगों को मार रही है और सब कुछ बर्बाद कर रही है।’’
उन्होंने अपने पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस का हवाला देते हुए आगाह किया कि ‘‘लगातार अन्याय, बुराई, उदासीनता और क्रूरता’’ के सामने उदासीन न बनें, क्योंकि ‘‘यह भी सच है कि अंधेरे के बीच कुछ नया हमेशा जन्म लेता है और देर-सबेर फल देता है।’’
ईसाइयों के लिए ईस्टर वह अवसर है, जब वे ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने के बाद उनके पुनर्जीवित होने और मृत्यु पर उनकी जीत को याद करते हैं।
यरुशलम में ‘चर्च ऑफ द होली सेपल्चर’ में होने वाले पारंपरिक धार्मिक समारोह इजराइली पुलिस के साथ हुए एक समझौते के तहत सीमित पैमाने पर आयोजित किए गए हैं। माना जाता है कि इसी स्थान पर ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया और वह पुनर्जीवित हुए। युद्ध के बीच जारी मिसाइल हमलों के कारण अधिकारियों ने बड़ी सार्वजनिक सभाएं नहीं करने के निर्देश जारी किये हैं।
इन प्रतिबंधों का असर हाल ही में खत्म हुए रमजान के महीने और ईद-उल-फितर के जश्न पर भी पड़ा, साथ ही इस समय चल रहे एक सप्ताह के यहूदी पर्व ‘पासओवर’ पर भी असर देखा गया।
इन प्रतिबंधों से इजराइली प्रशासन और ईसाई धार्मिक नेताओं के बीच तनाव बढ़ गया है। पिछले सप्ताह पुलिस ने गिरजाघर के दो शीर्ष धार्मिक नेताओं को ‘पाम संडे’ के अवसर पर गिरजाघर में प्रार्थना करने से रोक दिया था।
मंगलवार को पोप ने उम्मीद जताई थी कि ईस्टर से पहले युद्ध समाप्त हो सकता है।
एपी गोला सुभाष
सुभाष