वाशिंगटन, 14 अप्रैल (एपी) यूरोप के छोटे से देश हंगरी में सप्ताहांत में चुनाव हुए, जो वाशिंगटन से काफी दूर है, लेकिन इसमें प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की हार का असर अमेरिका में भी पड़ने की संभावना है।
ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई अन्य अमेरिकी नेता लंबे समय से ओर्बन के समर्थक रहे हैं, जो अपने प्रवासी-विरोधी रुख के कारण वैश्विक दक्षिणपंथियों के बीच एक प्रतीक बन गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति का एजेंडा हंगरी के नेता द्वारा सरकार के साधनों का उपयोग करके मीडिया, न्यायपालिका और चुनावी प्रणाली को प्रभावित करने के तरीके से काफी मिलता-जुलता है, ताकि उनकी पार्टी 16 वर्षों तक सत्ता में बनी रहे।
ट्रंप ने ओर्बन के पुनर्निर्वाचन अभियान का समर्थन किया था और यहां तक कि पिछले सप्ताह ईरान युद्ध के बीच उपराष्ट्रपति जे डी वेंस को बुडापेस्ट भेजा ताकि वे मौजूदा प्रधानमंत्री का समर्थन कर सकें।
ओर्बन की हार इस बात की याद दिलाती है कि युद्ध ने विदेशों में सहयोगी नेताओं की मदद करने की ट्रंप की क्षमता को कितना कम कर दिया है। साथ ही यह भी कि विश्वभर में सभी विचारधाराओं के मौजूदा नेताओं के प्रति असंतोष के इस दौर में, नेताओं के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करके मतदान को अपने पक्ष में मोड़ने की क्षमता सीमित हो गई है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और ‘हाउ डेमोक्रेसीज डाई’ पुस्तक के सह-लेखक स्टीवन लेविट्स्की ने कहा, ‘‘विपक्ष असमान परिस्थितियों के बावजूद जीत सकता है। दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन निरंकुश शासन भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।’
ओर्बन की हार के तत्काल वैश्विक परिणाम होंगे क्योंकि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे करीबी यूरोपीय नेता थे और उन्होंने यूक्रेन को यूरोपीय संघ की सहायता रोक दी थी, जो 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से अपना बचाव कर रहा है।
रविवार को डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ने ही ओर्बन के पतन का जश्न मनाया, जिनमें से कुछ ने हंगरी के नेता के प्रति इस तरह के खुले समर्थन के लिए अपने ही प्रशासन की आलोचना की।
नेब्रास्का के रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘अन्य लोकतंत्रों के चुनावों में दखलंदाजी न करें।’
मिसिसिपी के रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर ने पोस्ट किया, ‘‘हंगरी की स्वतंत्रता-प्रेमी जनता ने लोकतंत्र और कानून के शासन के पक्ष में निर्णायक रूप से मतदान किया है।’’
वेंस ने सोमवार को फॉक्स न्यूज से कहा, ‘‘हम इसलिए वहां गए क्योंकि यह करना सही था।’’
अमेरिकन कंजर्वेटिव यूनियन के अध्यक्ष मैट श्लैप ने कहा कि ओर्बन की हार का एक सीधा सा कारण है। उन्होंने कहा, ‘‘अंततः, लोकतंत्र केवल बदलाव चाहता है। लोकतंत्र में राजा नहीं होते और अंत में जनता ही अपनी बात रखती है।’’
श्लैप ने कहा, ‘‘हंगरी के लोग कह रहे थे, ‘हम मुद्रास्फीति, अर्थव्यवस्था और युद्ध से जूझ रहे हैं। चलो किसी नए व्यक्ति को मौका देते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि वह ट्रंप के ईरान युद्ध का समर्थन करते हैं, लेकिन इससे पैदा हुई उथल-पुथल, खासकर यूरोपीय ऊर्जा बाजारों में पड़े असन ने ऑर्बन को नुकसान पहुंचाया।
रोमानिया से यूरोपीय संसद की धुर दक्षिणपंथी सदस्य डायना सोसोका ने रविवार को महाद्वीप में ईरान युद्ध के प्रति व्यापक आक्रोश को देखते हुए वेंस की हंगरी यात्रा को ‘एक बड़ी गलती’ बताया।
एपी अमित वैभव
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