एआई से बने चेहरों को पहचानना अब पहले जितना आसान नहीं रहा

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एआई से बने चेहरों को पहचानना अब पहले जितना आसान नहीं रहा

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 04:03 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 04:03 PM IST

(एमी डॉवेल और तान्या जॉर्ज, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी; एरिक माह और जिम तनाका, यूनिवर्सिटी ऑफ विक्टोरिया)

कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया), 30 जून (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किए गए ‘डीपफेक’ चेहरे अब इतने वास्तविक दिखने लगे हैं कि वे अक्सर लोगों को धोखा दे देते हैं। कुछ शोध के अनुसार, 2027 तक डीपफेक से जुड़ी धोखाधड़ी का वार्षिक मूल्य 40 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।

ज्यादातर लोगों के लिए एआई से बने चेहरों को पहचानना मुश्किल होता है। 2023 में हमें पता चला था कि कुछ एआई-निर्मित चेहरे इतने ‘हाइपर-रियल’ होते हैं कि वे वास्तविक इंसानी चेहरों से भी अधिक असली प्रतीत होते हैं।

हमने यह भी पाया कि लोग अक्सर यह मानने में जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास दिखाते हैं कि वे एआई चेहरों की पहचान कर सकते हैं, जबकि सबसे अधिक आत्मविश्वासी लोग ही सबसे ज्यादा गलतियां करते हैं।

डीपफेक का पता लगाने वाले सॉफ्टवेयर मौजूद तो हैं लेकिन वे यह नहीं बता पाते कि उन्होंने कैसे पता लगाया और उनमें कुछ बड़ी कमियां भी हैं। कुछ को तो बस तस्वीर का प्रारूप बदलकर जैसे पीएनजी से जेपीजी में बदलकर आसानी से धोखा दिया जा सकता है।

हालांकि, यह भी सामने आया है कि अधिकतर लोग लगभग एक घंटे के अभ्यास से एआई-निर्मित चेहरों की पहचान करना सीख सकते हैं। ‘पीएनएएस’ में प्रकाशित हमारे नए शोध में हमने दिखाया है कि डीपफेक का पता लगाने की क्षमता को बेहतर बनाने का एक आसान तरीका है: लोगों को सीधे निर्देश देने के बजाय अनुभव के ज़रिए पहचान के खास संकेतों को समझना सिखाना।

इंसानी और एआई निर्मित चेहरे में अंतर

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अपने शुरुआती शोध में हमने एआई और इंसानी चेहरों के बीच एक अहम अंतर पाया। एआई निर्मित चेहरे ‘हाइपर-एवरेज’ (अत्यधिक औसत विशेषताओं वाले) होते हैं।

इसका मतलब है कि एआई निर्मित चेहरे, इंसानी चेहरों के मुकाबले अधिक ‘सिमेट्रिकल’ (संतुलित), सही अनुपात वाले और आकर्षक होते हैं। लेकिन उनमें भाव कम होते हैं और वे कम यादगार होते हैं – यानी भीड़ में उनके अलग दिखने की संभावना कम होती है।

दिलचस्प बात यह है कि लोग इन विशेषताओं का सटीक और भरोसेमंद आकलन तो कर सकते हैं, लेकिन अक्सर उनके संकेतों की गलत व्याख्या कर बैठते हैं। उदाहरण के लिए, लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि जो चेहरे थोड़े असामान्य या अटपटे दिखते हैं वे एआई द्वारा बनाए गए हैं जबकि वास्तव में मानव चेहरों में ही विशिष्ट और असामान्य विशेषताएं होने की संभावना अधिक होती है।

एआई की पहचान करना सीखना

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अपने अध्ययन में हमने ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की अपनी प्रयोगशाला में 45 लोगों को बुलाया और उनसे लगभग 100 चेहरों को छह खूबियों के आधार पर मूल्यांकन करने को कहा। ये विशेषताएं एआई-निर्मित चेहरों और वास्तविक मानव चेहरों में अंतर करने में सहायक होती हैं जैसे विशिष्ट पहचान, याद रहने की क्षमता, अनुपात, समरूपता, आकर्षण और भाव-भंगिमा।

हमने लोगों को यह नहीं बताया कि ये संकेत एआई निर्मित चेहरे और असली चेहरे में फर्क करने में कैसे मदद कर सकते हैं क्योंकि उन्हें यह बात खुद ही समझनी थी।

प्रशिक्षण से पहले और बाद में हमने नए चेहरों का इस्तेमाल करके यह परीक्षण किया कि प्रतिभागी एआई निर्मित चेहरों और इंसानी चेहरों में फर्क कर पाते हैं या नहीं; इन नए चेहरों का इस्तेमाल प्रशिक्षण के दौरान नहीं किया गया था।

प्रशिक्षण कारगर रहा

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एक परीक्षण में प्रतिभागियों को तीन चेहरे दिखाए गए-दो वास्तविक मानव चेहरे और एक एआई द्वारा बनाया गया चेहरा। उनसे एआई-निर्मित चेहरे की पहचान करने के लिए कहा गया। इस परीक्षण में प्रशिक्षण से पहले उनकी औसत सटीकता 40 प्रतिशत थी, जो प्रशिक्षण के बाद बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई।

खास बात यह है कि सभी लोगों की एआई निर्मित चेहरों को पहचानने की क्षमता में सुधार हुआ और कई लोगों ने लगभग 100 प्रतिशत सटीकता हासिल की। ​​लोग अपने सही फैसलों को लेकर अधिक सटीक और आत्मविश्वासी भी हो गए।

इन नतीजों की मजबूती को परखने के लिए कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ विक्टोरिया की ‘डिफरेंट माइंड्स लैब’ ने कनाडाई लोगों के साथ एआई निर्मित चेहरों को पहचानने की प्रशिक्षण को दोहराया।

एक आशाजनक शुरुआत

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लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमने एआई पहचान की समस्या को पूरी तरह हल कर लिया है। हमारे प्रशिक्षण में स्टाइलजीएएन3 नामक एक विशेष जेनरेटिव एआई मॉडल द्वारा बनाए गए चेहरों का उपयोग किया गया था।

यह सबसे असली दिखने वाले चेहरे बनाने वाले मॉडल में से एक है, लेकिन यह प्रौद्योगिकी तेजी से आगे बढ़ रही है और कई दूसरे मॉडल भी मौजूद हैं।

हमारे तरीके में यह क्षमता है कि इसे नए मॉडलों के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण चित्रों को अद्यतन करना और मल्टीमीडिया का उपयोग करना होगा, लेकिन अभी हमारे पास इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि यह तरीका वास्तव में प्रभावी होगा।

एआई से बने चेहरों को पहचानने के लिए हमें जो संकेत मिले हैं, वे दूसरे मॉडल के मामले में अलग हो सकते हैं। कुछ अहम सवाल भी हैं: क्या प्रशिक्षण से मिलने वाले फायदे लंबे समय तक बने रहते हैं? क्या यह प्रशिक्षण हर उम्र के लोगों के लिए असरदार है, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं?

एआई से बने चेहरों को पहचानने की अपनी संभावनाओं को कैसे बेहतर बनाएं

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अगर आप एआई निर्मित चेहरों को पहचानने में बेहतर होना चाहते हैं तो बहुत सारे उदाहरण देखना एक अच्छी शुरुआत है। आप ‘व्हिच फेस इज रियल’ या ‘दिस पर्सन डज नॉट एग्जिस्ट’ जैसी वेबसाइट पर ऐसे कई चेहरे देख सकते हैं।

देखते समय, उन छह मुख्य बातों का ध्यान रखें जिनकी हमने पहचान की है:

–चेहरा कितना खास है?

–क्या वह चेहरा याद रहने वाला है?

–चेहरे के अंग कितने सही अनुपात में हैं?

–चेहरा कितना समरूप है?

–चेहरा कितना आकर्षक है?

–चेहरे से कितने भाव झलकते हैं?

यह अभ्यास आपकी ‘डीपफेक’ चेहरा को पहचानने की क्षमता को बेहतर बना सकता है। लेकिन इससे मिलने वाला अधिक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि एआई-जनित ‘डीपफेक’ चेहरे बहुत तेजी से बेहतर हो रहे हैं और वे हमें आसानी से धोखा दे सकते हैं भले ही हमें लगे कि हम उन्हें पहचान सकते हैं।

द कन्वरसेशन सुरभि संतोष

संतोष