सिंगापुर, नौ जनवरी (भाषा) सिंगापुर की संसद में अगले सप्ताह इस मुद्दे पर बहस होगी कि क्या भारतीय मूल के प्रीतम सिंह संसदीय समिति के समक्ष झूठ बोलने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भी विपक्ष के नेता (एलओपी) के पद पर बने रह सकते हैं या नहीं। एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई।
सिंगापुर के नागरिक और वर्कर्स पार्टी (डब्ल्यूपी) के महासचिव प्रीतम सिंह को पिछले साल फरवरी में पार्टी की पूर्व सदस्य रईसा खान से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। रईसा खान ने संसद में झूठा बयान देने की बात स्वीकार की थी।
सदन की नेता इंद्राणी राजा ने संसद के आगामी सत्र के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है जो 12 जनवरी से शुरू होगा। इंद्राणी स्वयं भी भारतीय मूल की हैं और सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी (पीएपी) की वरिष्ठ नेता हैं।
सदन की नेता के कार्यालय ने बताया कि यह प्रस्ताव 13 जनवरी को या सप्ताह के अंत में चर्चा के लिए उठाया जाएगा।
प्रस्ताव में सदन से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया गया है कि ‘‘दोषसिद्धि और उनके इस आचरण के बाद भी क्या सिंह विपक्ष के नेता के रूप में बने रहने के लिए उपयुक्त हैं या नहीं’’।
प्रस्ताव में उनके आचरण पर खेद व्यक्त किया गया है और एक सांसद के लिए इसे “अपमानजनक और अशोभनीय” बताया गया है।
इसमें कहा गया है कि विपक्ष के नेता का पद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों, कर्तव्यों और विशेषाधिकारों से जुड़ा होता है तथा 49 वर्षीय सिंह का नेता प्रतिपक्ष रूप में बने रहना “संसद की प्रतिष्ठा और सिंगापुर की राजनीतिक व्यवस्था की ईमानदारी में जनता के विश्वास को कमजोर करेगा।”
फरवरी में अदालत ने सिंह पर 14,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 10,700 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाया था। अगस्त 2021 में संसद में झूठा दावा करने के बाद रईसा खान ने पिछली संसद से इस्तीफा दे दिया था।
भाषा खारी मनीषा
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