लंबे समय से जेल में बंद पीएफआई के दो आरोपियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी जमानत

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लंबे समय से जेल में बंद पीएफआई के दो आरोपियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी जमानत

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  • Publish Date - August 12, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - August 12, 2026 / 09:15 PM IST

लखनऊ, 12 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो संदिग्ध सदस्यों को जमानत देते हुए कहा है कि लंबे समय तक जेल में निरुद्ध रखना और मुकदमे की धीमी सुनवाई संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने केरल निवासी अनसद बदरुद्दीन और फिरोज खान की आपराधिक अपील पर यह आदेश पारित किया। दोनों आरोपी 17 फरवरी 2021 से जेल में बंद हैं।

अदालत ने पाया कि मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए दो बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष के 18 गवाहों में से केवल पांच से ही जिरह हो सकी है और निकट भविष्य में भी मुकदमे के जल्द पूरा होने के आसार नहीं हैं।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह के लिए 95 तारीखें तय की गईं, लेकिन केवल 11 गवाहों की गवाही पूरी हो सकी और पांच गवाहों से जिरह हुई। पीठ ने यह भी पाया कि एक मुख्य गवाह से जिरह पूरी कराने के लिए कई अवसर दिए जाने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका।

अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही पूरी कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने में विफलता पर आश्चर्य जताते हुए अदालत ने कहा कि इस निष्क्रियता से अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को लाभ हुआ है, जबकि गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43-डी (5) के तहत जमानत देने पर कड़े प्रतिबंध हैं।

अदालत ने सात दिसंबर 2022 को निचली अदालत को मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जनवरी 2024 में भी अभियोजन पक्ष के गवाहों से तत्काल जिरह कराने का निर्देश दिया गया था।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि बदरुद्दीन और खान ने हिंदू संगठनों के नेताओं और सदस्यों को निशाना बनाने तथा आतंक फैलाने के लिए धार्मिक सभाओं में बम विस्फोट करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश की यात्रा की थी। आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) ने दोनों के पास से हथियार, विस्फोटक, डेटोनेटर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करने का दावा किया है।

उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत के 14 मई 2024 के आदेश को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी। जमानत की शर्तों में 15 दिन के भीतर एटीएस के समक्ष पेश होना और मुकदमे की महत्वपूर्ण तारीखों पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना शामिल है।

भाषा

सं, राजेंद्र रवि कांत