( शियांदा हौंग, लॉस एंजिलिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के एशियन लैंग्वेज एंड कल्चर्स विभाग में पीएचडी छात्र )
लॉस एंजिलिस, 20 मई (द कन्वरसेशन) कूटनीति अक्सर रंगमंच की तरह विविधतापूर्ण होती है। और यह हाल ही में नजर आई, जब लगभग नौ साल पहले हुई अपनी पहली राजकीय चीन यात्रा के बाद डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर बीजिंग पहुंचे।
उनके साथ वरिष्ठ नेताओं का एक समूह, बड़ी संख्या में कारोबारी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आला अधिकारी शामिल थे। यह अमेरिकी राजनीतिक और कॉरपोरेट शक्ति का प्रदर्शन था।
लेकिन मेजबान चीन भी प्रतीकात्मकता के मामले में पीछे नहीं था। ट्रंप की 2017 की चीन यात्रा पहले ही यह दिखा चुकी थी कि बीजिंग कूटनीति को रंगमंच में बदलने के लिए कितना आगे जा सकता है। उस समय चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने स्वयं ट्रंप और मेलानिया ट्रंप को बीजिंग के ‘फॉरबिडन सिटी’ में घुमाया था, शाही महल परिसर में चाय पिलाई थी और ‘बेल्वेडियर ऑफ प्लेज़ेंट साउंड्स’ नामक शाही थिएटर में पेकिंग ओपेरा दिखाया था।
इस बार की औपचारिक गतिविधियों की शुरुआत बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई, जहां दोनों नेताओं ने ईरान संघर्ष, यूक्रेन युद्ध और कोरियाई प्रायद्वीप जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
यात्रा की दिलचस्प कहानी बैठक कक्ष के बाहर सामने आई। दो घंटे की द्विपक्षीय वार्ता के बाद ट्रंप और शी दक्षिणी बीजिंग स्थित ‘टेंपल ऑफ हेवन’ गए। 15वीं शताब्दी की शुरुआत में बना यह मंदिर चीन का सबसे संरक्षित शाही धार्मिक परिसर है। लगभग पाँच शताब्दियों तक मिंग और किंग राजवंशों के सम्राट यहाँ ‘स्वर्ग’ की पूजा करने और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करने आते थे।
इसकी सबसे प्रसिद्ध संरचना ‘हॉल ऑफ प्रेयर फॉर गुड हार्वेस्ट्स’ तीन स्तरों वाली नीली टाइलों वाली छत और संगमरमर के मंच पर स्थित है, जिसकी गोलाकार संरचना और लाल स्तंभ ब्रह्मांडीय व्यवस्था को वास्तुकला में व्यक्त करते हैं। यूनेस्को ने इसे 1998 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था और इसे “वास्तुकला और परिदृश्य डिजाइन की उत्कृष्ट कृति” बताया था।
जब ट्रंप और शी ने तस्वीरों के लिए पोज दिया, तो वे ऐसे स्थान पर खड़े थे, जो लंबे समय से ब्रह्मांडीय व्यवस्था और जन कल्याण से जुड़ा रहा है। किसी विदेशी नेता को यहाँ लाना केवल दो देशों के बीच संबंधों को व्यवस्था, समृद्धि और शांति के प्रतीक से जोड़ने का संकेत माना जाता है, जैसा कि बीजिंग चाहता है।
इस प्रतीकवाद का एक व्यावहारिक पक्ष भी था। ‘टेंपल ऑफ हेवन’ राजनीतिक सत्ता को कृषि समृद्धि से जोड़ता है। सम्राट फसल के लिए प्रार्थना करने आते थे। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, जब अमेरिकी कृषि निर्यात—जैसे सोयाबीन, अनाज और बीफ—वार्ता के केंद्र में थे।
ट्रंप के लिए यदि चीन की ओर से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में वृद्धि का कोई आश्वासन मिलता, तो उसका घरेलू राजनीतिक महत्व होता। शी के लिए यह स्थान व्यापारिक मुद्दे को फसल और समृद्धि की पारंपरिक भाषा में बदलने का अवसर देता था।
ट्रंप पहले अमेरिकी नेता नहीं थे, जिन्हें ‘टेंपल ऑफ हेवन’ ले जाया गया हो। जुलाई 1971 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर गुप्त बीजिंग यात्रा पर आए थे, जिसने दो दशकों से अधिक समय से सीमित संपर्क वाले दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू की थी। प्रधानमंत्री चाउ एनलाई के साथ वार्ता के बीच किसिंजर भी इस मंदिर में आए थे।
सरू के पुराने वृक्षों के बीच खड़े होकर उन्होंने कथित रूप से उस स्थान के कालातीत वातावरण से गहरा प्रभाव महसूस किया था।
पुराने वृक्षों और समय की गहराई का यही विषय 15 मई को भी सामने आया, जब शी ने ट्रंप को झोंगनानहाई परिसर में घुमाया। यह परिसर चीन की शीर्ष पार्टी और राज्य नेतृत्व का केंद्र है।
रॉयटर्स के अनुसार, एक ‘हॉट माइक’ रिकॉर्डिंग में शी ने ट्रंप का ध्यान परिसर में मौजूद सैकड़ों वर्षों पुराने पेड़ों की ओर दिलाया, जिनमें से कुछ एक हजार वर्ष से भी पुराने बताए जाते हैं। जब ट्रंप ने पूछा कि क्या शी अन्य राष्ट्रपतियों को भी इस तरह की सैर कराते हैं, तो शी ने कहा कि यह बहुत कम ही होता है।
किसिंजर की यात्रा और झोंगनानहाई की सैर मिलकर अमेरिका–चीन कूटनीति की एक पुनरावृत्त रणनीति दिखाती है—जहाँ अमेरिका की तेज़ गति वाली अर्थव्यवस्था को चीन की दीर्घकालिक परंपरा से परिचित कराया जाता है। शी ने यह तरीका अन्य नेताओं के साथ भी अपनाया है। 2023 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चीन यात्रा के दौरान गूचिन संगीत प्रस्तुति देखी थी, जिसमें पारंपरिक ‘झीइन’ की अवधारणा प्रस्तुत की गई थी।
ट्रंप की यात्रा केवल शाही भव्यता तक सीमित नहीं थी। यह भोजन, खेल और लोकप्रिय संस्कृति के परिचित संदर्भों में भी आगे बढ़ी।
चौदह मई के राजकीय रात्रिभोज को दोनों देशों की पाक परंपराओं और अमेरिकी पसंद—विशेषकर ट्रंप की पसंद—के अनुसार तैयार किया गया था। मेनू में पेकिंग रोस्ट डक, क्रिस्पी बीफ रिब्स, पैन-फ्राइड पोर्क बन, तिरामिसु और फल व आइसक्रीम थे।
ट्रंप ने शी को “अद्वितीय भव्य स्वागत” के लिए धन्यवाद दिया और बातचीत को ऐसे विषयों की ओर मोड़ा, जो अमेरिका और चीन के लोगों के बीच संबंधों को दर्शाते हैं—जैसे चीनी श्रमिक जिन्होंने अमेरिकी रेलमार्ग बनाए, चीन में बास्केटबॉल की लोकप्रियता, जींस और अमेरिका में चीनी रेस्तरां की उपस्थिति।
बास्केटबॉल विशेष रूप से महत्वपूर्ण संदर्भ था। अप्रैल 2026 में दोनों देशों ने पिंग-पोंग कूटनीति की 55वीं वर्षगांठ मनाई थी, जिसने 1971 में संबंधों को नई दिशा दी थी। अब बास्केटबॉल उसी तरह एक सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है।
चीनी प्रशंसकों के लिए एनबीए माइकल जॉर्डन, कोबी ब्रायंट, लेब्रोन जेम्स और याओ मिंग जैसे खिलाड़ियों के माध्यम से अमेरिका की छवि प्रस्तुत करता है। यह भावनात्मक जुड़ाव राजनीतिक तनाव के दौर में भी बना रहा है। ट्रंप द्वारा इसका उल्लेख इसी साझा सांस्कृतिक आधार को दर्शाता है।
इस पूरे प्रतीकवाद से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका–चीन संबंधों में माहौल और प्रतीकात्मकता हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं।
कूटनीतिक रंगमंच तकनीक, ताइवान या वैश्विक व्यवस्था से जुड़े विवादों को हल नहीं कर सकता, लेकिन यह तनाव को प्रबंधित करने और जनता के सामने रिश्तों की कहानी गढ़ने में मदद करता है।
इस यात्रा ने चीन को अपने नेतृत्व को सक्षम और आत्मविश्वासी रूप में प्रस्तुत करने का अवसर दिया, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के लिए यह चीनी परंपराओं को समझने का अनुभव था। दोनों समाजों के लिए भोजन, खेल और लोकप्रिय संस्कृति ने एक तटस्थ भावनात्मक आधार प्रदान किया।
द कन्वरसेशन
मनीषा दिलीप
दिलीप