(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, चार मई (भाषा) अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के दो व्यक्तियों ने पाकिस्तान की संघीय सिविल सेवा में शामिल होने की योग्यता प्राप्त कर ली है, जहां सरकारी नौकरियों में ऐसे समूहों का प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से कम है।
सिंध प्रांत के जीवन रेबारी और खेम चंद जंडोरा उन 170 उम्मीदवारों में शामिल थे, जो बृहस्पतिवार को संघीय लोक सेवा आयोग (एफपीएससी) द्वारा घोषित परिणाम में केंद्रीय उच्च सेवा (सीएसएस) में शामिल होने के लिए अर्हता प्राप्त कर चुके हैं।
2023 की जनगणना के अनुसार, 38 लाख की कुल आबादी के साथ हिंदू पाकिस्तान में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है, जो अधिकतर सिंध प्रांत में रहते हैं।
पाकिस्तान में केंद्रीय उच्च सेवाओं में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से कम है, जिसके चलते सरकार ने समावेश बढ़ाने के लिए 2025 में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी पहल शुरू कीं।
एफपीएससी के अनुसार, देशभर से 12,792 लोगों ने लिखित परीक्षा में भाग लिया, जिनमें से 355 उत्तीर्ण हुए, और आगे के दौरों के बाद चयनित उम्मीदवारों की कुल संख्या 170 रही।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 123 सीटें खाली हैं, जो शीर्ष सूची में इन पुरुषों के शामिल होने के महत्व को और भी उजागर करता है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, खेम चंद के माता-पिता को अपने बेटे की शिक्षा के लिए उच्च ब्याज दरों पर ऋण लेना पड़ा और गहने बेचने पड़े, जबकि जीवन, संसाधनों की कमी के कारण, एक गुरुद्वारे में शरण लेकर लंगर से अपनी जरूरतों को पूरा करता था।
बताया गया कि खेम चंद जंडोरा समुदाय से संबंध रखते हैं।
सिंधी समुदाय जंडोरा का नाम ‘जंड’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है भारी पत्थर की चक्की। यह समुदाय गेहूं पीसने और आटा बेचने के लिए इस चक्की का उपयोग करता था।
खेम चंद के पिता इस समुदाय के पहले ‘क्रांतिकारी’ थे, क्योंकि शिक्षा प्राप्त करना विद्रोह और पैतृक कार्यों के साथ विश्वासघात माना जाता था।
जीवन रेबारी की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अल्पसंख्यक कोटा का सहारा नहीं लिया, बल्कि उच्च शिक्षा के लिए सामान्य योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की।
जीवन एक ऐसे समुदाय से आते हैं जिसका ऐतिहासिक रूप से पशुपालन और चारा-पानी की तलाश में गांव-गांव भटकना ही मुख्य काम था। उन्होंने विश्वविद्यालय तक की शिक्षा सरकारी संस्थानों से प्राप्त की।
उन्होंने 2021 में सिंध विश्वविद्यालय के विधि विभाग से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की और फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए लाहौर चले गए। जीवन ने 2023 में पहली बार परीक्षा दी।
भाषा तान्या वैभव
वैभव