(अदिति खन्ना)
लंदन, 20 जनवरी (भाषा) ब्रिटेन सरकार ने मंगलवार को लंदन के मध्य में तथाकथित ‘मेगा या सुपर दूतावास’ बनाने की चीन की योजना को मंजूरी दे दी तथा सांसदों और कार्यकर्ताओं द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं को दरकिनार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सभी ‘‘संबंधित पहलुओं’’ को ध्यान में रखा गया है।
लंदन टावर के पास पूर्व रॉयल मिंट कोर्ट के 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण के लिए योजना संबंधी अनुमति को राष्ट्रीय महत्व के मामले के रूप में मंत्रिस्तरीय समीक्षा के लिए रखा गया था।
लेबर पार्टी सरकार के खुद के सांसदों और विपक्षी ‘टोरी’ (कंजरवेटिव पार्टी के) सांसदों ने भी इस योजना को मंजूरी दिए जाने का कड़ा विरोध किया था, क्योंकि यह स्थल लंदन शहर के वित्तीय जिले के निकट स्थित है और उन्होंने चीन को एक ‘‘शत्रुतापूर्ण राष्ट्र’’ के रूप में चित्रित किया।
ब्रिटेन के आवास और समुदाय मंत्री स्टीव रीड ने कहा, ‘‘यह बयान लंदन में एक नए दूतावास के लिए योजना अनुमति और सूचीबद्ध भवन सहमति प्रदान करने के मेरे आज के निर्णय के बाद आया है।’’ उन्होंने इस सप्ताह औपचारिक रूप से योजनाओं को मंजूरी दी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णय लेते समय सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा गया। यह निर्णय अब अंतिम है, जब तक कि इसे अदालत में सफलतापूर्वक चुनौती न दी जाए।’’
मंत्री ने कहा कि उनका निर्णय स्वतंत्र योजना निरीक्षक की सिफारिश के अनुरूप है जिन्होंने पिछले साल फरवरी में इस मामले की सार्वजनिक जांच की थी।
आवास, समुदाय और स्थानीय शासन मंत्रालय (एमएचसीएलजी) ने नए दूतावास के लिए योजना को मंजूरी देने के तर्क को विस्तार से बताने वाला 240 पृष्ठों का एक दस्तावेज जारी किया।
योजना निरीक्षक क्लेयर सियरसन की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘आखिर में, मेरा स्पष्ट मत है कि यह प्रस्ताव समग्र रूप से विकास योजना के अनुरूप है। ऐसा कोई अन्य महत्वपूर्ण कारक नहीं दिखता जिसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि योजना अनुमति और सूचीबद्ध भवन स्वीकृति प्रदान नहीं की जानी चाहिए।’’
उन्होंने अपने विश्लेषण में इस बात पर प्रकाश डाला कि वियना संधि के तहत योजना अनुमतियां ‘‘राष्ट्र-तटस्थता’’ के आधार पर प्रदान की जाती हैं।
चीन ने 2018 में इस ऐतिहासिक स्थल को 22.5 करोड़ पाउंड में खरीदा और स्थानीय ‘टावर हैमलेट्स काउंसिल’ को इस स्थल को ‘बेकर स्ट्रीट’ के पास ‘पोर्टलैंड प्लेस’ में स्थित अपने वर्तमान स्थान की तुलना में एक बहुत बड़े लंदन दूतावास में बदलने की योजना प्रस्तुत की।
उस वक्त सरकार ने इन योजनाओं को खारिज कर दिया था और इन्हें वापस ले लिया था लेकिन हाल के हफ्तों में यह बात सामने आई है कि ब्रिटेन की ‘एमआई5’ और ‘एमआई6’ सुरक्षा सेवाओं ने इन योजनाओं पर कोई औपचारिक आपत्ति नहीं जताई थी। वहीं, ‘डाउनिंग स्ट्रीट’ (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) का मानना है कि चीन के राजनयिक परिसरों को एक ही स्थान पर समेकित करने से सुरक्षा के लिहाज से कुछ फायदे होंगे।
इस संबंध में एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, ‘‘व्यापक रूप से देखा जाए तो देशों द्वारा अन्य देशों की राजधानियों में दूतावास स्थापित करना अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक सामान्य हिस्सा है। राष्ट्रीय सुरक्षा हमारा सर्वोपरि कर्तव्य है। इस पूरी प्रक्रिया में खुफिया एजेंसियां शामिल रही हैं और किसी भी जोखिम से निपटने के लिए व्यापक उपाय विकसित किए गए हैं।’’
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हाल के महीनों में व्यापक बातचीत के बाद चीन की सरकार लंदन में अपने सात मौजूदा स्थलों को एक ही स्थल में समेकित करने पर सहमत हो गई है, जिससे स्पष्ट सुरक्षा लाभ प्राप्त होंगे।’’
इस महीने के अंत में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर की चीन की यात्रा से पहले इस मंजूरी की व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही थी जो आठ वर्षों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी।
ब्रिटेन की छाया विदेश मंत्री प्रीति पटेल ने कहा, ‘‘लंदन के मध्य में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को उसका ‘सुपर दूतावास’ जासूसी केंद्र देने का लेबर पार्टी का निर्णय गलत है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘केअर स्टॉर्मर ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर किया है और एक ऐसे शासन को पुरस्कृत किया है जो हमारे हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, यहां रहने वाले हांगकांग वासियों को धमकी दे रहा है और जिमी लाई को जेल में बंद रखना जारी रखे हुए है।’’
पिछले हफ्ते, लेबर पार्टी के नौ सांसदों ने आवास मंत्री को पत्र लिखकर उनसे योजनाओं को खारिज करने का अनुरोध किया था और इस मुद्दे को निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में भी उठाया गया था।
लेबर पार्टी की सांसद सारा चैंपियन ने कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि मेरी सरकार दादागीरी करने वालों के खिलाफ खड़ी हो, न कि उन्हें पुरस्कृत करे। हमें चीन के इर्द-गिर्द नियम और सीमाएं लागू करने की जरूरत है ताकि इस तरह के व्यवहार को रोका जा सके, न कि उन्हें वह दूतावास देकर पुरस्कृत किया जाए जिसकी उन्हें इतनी शिद्दत से चाहत है।’’
चीन ने इससे पहले जासूसी के सभी दावों को खारिज किया था। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा था कि ‘‘चीन विरोधी तत्व हमेशा देश को बदनाम करने और उस पर हमला करने के लिए उत्सुक रहते हैं।’’
भाषा सुरभि नेत्रपाल
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