US Iran Peace Talks/Photo Credit: Social Media
US Iran Peace Talks: हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को लेकर हुए समझौते के बीच एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है, अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में उच्चस्तरीय शांति वार्ता एक बार फिर संकट में घिर गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को वार्ता बीच में छोड़ दी।
ट्रंप ने दी ईरान को धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था। ट्रंप की यह चेतावनी राजनयिक प्रक्रिया के लिए एक नाजुक समय पर आई है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारी इस महीने की शुरुआत में हस्ताक्षरित एक एमओयू के तहत स्विट्जरलैंड में बैठक कर रहे हैं, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज जलमार्ग, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कई मोर्चों पर सीजफायर जैसे व्यापक वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मेहदी गोरबनजादेह ने सरकारी मीडिया से कहा, जब तक लेबनान की स्थिति का समाधान नहीं हो जाता, तब तक अन्य मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं होगी। यदि लेबनान में युद्ध समाप्त नहीं होता, तो दूसरे विषयों पर वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के मकसद से होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत के लिए रविवार को स्विट्जरलैंड पहुंचने वाले बड़े नेताओं में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए थे। वेंस जबकि अमेरिका की तरफ से बातचीत में शामिल होने वाले दूत स्टीव विटकोफ और सलाहकार जेरेड कुशनर पहले से ही वहां मौजूद थे।
वेंस ने रवाना होने से पहले फॉक्स न्यूज से कहा था कि, जेरेड और स्टीव से (शनिवार) सुबह हुई बातचीत के आधार पर मुझे लगता है कि सबकुछ ठीक चल रहा है। सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गालिबाफ ने किया। खबर में कहा गया, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बघेरी कानी और ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासेर हेम्मती भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ भी रविवार को ज्यूरिख पहुंचे। उनके साथ सेना प्रमुख आसिम मुनीर और अन्य प्रतिनिधि भी थे। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने शनिवार को एक बयान में कहा, पाकिस्तान, इस्लामाबाद सहमति पत्र के तहत बनी समझ को आगे बढ़ाने के मकसद से, मध्यस्थ की अपनी भूमिका में इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना जारी रखेगा। ‘इरना’ ने यह भी बताया कि रविवार को अराघची और उनके स्विस समकक्ष इग्नाज़ियो कैसिस के बीच बैठक हुई।
आधिकारिक बयान के अनुसार, कतर के वार्ताकार भी इस बैठक में शामिल हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने पिछले हफ्ते एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए 60 दिन की बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई। मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने ‘गारंटर’ के तौर पर इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।