मस्कट, छह फरवरी (एपी) अमेरिकी अधिकारियों के एक काफिले के शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचने की खबर है, जहां तेहरान और वाशिंगटन के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत होने वाली है।
अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत पिछले साल जून में उस समय विफल हो गई थी, जब इजराइल ने तेहरान पर हमला कर दिया था। दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बम बरसाए थे, जिससे यूरेनियम संवर्द्धन के काम में जुटे कई सेंट्रीफ्यूज संभवत: नष्ट हो गए थे। वहीं, इजराइली हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को निशाना बनाया गया था।
समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के संवाददाताओं ने अमेरिकी अधिकारियों के काफिले को मस्कट के बाहरी इलाके में, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एक पैलेस में दाखिल होते देखा। संवाददाताओं के मुताबिक, काफिले में शामिल वाहनों में से एक पर अमेरिकी झंडा लहरा रहा था।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का काफिला शुक्रवार सुबह मस्कट पहुंचा। ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल ने कहा कि अराघची ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी से मुलाकात के लिए मस्कट पहुंचे हैं।
अराघची का काफिला बाद में हवाई अड्डे के पास स्थित एक होटल के लिए रवाना हो गया, जिसका इस्तेमाल ईरानी करते हैं।
‘एसोसिएटेड प्रेस’ के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के काफिले को मस्कट के बाहरी इलाके में जिस पैलेस में प्रवेश करते देखा गया, उसका इस्तेमाल ओमान ने 2025 में ईरान और अमेरिका के बीच हुई पिछली वार्ताओं में भी किया था।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो सहित अन्य शीर्ष नेताओं का मानना है कि ईरान में मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन को लेकर पिछले महीने हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश का धार्मिक शासन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अपने सबसे कमजोर दौर में है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि ट्रंप वर्षों के छद्म युद्ध, आर्थिक संकट और आंतरिक अशांति के कारण अस्थिरता के दौर से गुजर रहे ईरान को नये परमाणु समझौते के लिए तैयार होने पर मजबूर कर सकते हैं।
एपी पारुल पवनेश
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