गड्ढे भरना नेताओं के बस की बात क्यों नहीं?

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गड्ढे भरना नेताओं के बस की बात क्यों नहीं?

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  • Publish Date - May 10, 2026 / 01:03 PM IST,
    Updated On - May 10, 2026 / 01:03 PM IST

(अली रहमान और फिल व्हीट, लीड्स विश्वविद्यालय)

लंदन, 10 मई (द कन्वरसेशन) ब्रिटेन में सड़कों के गड्ढे न सिर्फ सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि ये वाहनों को नुकसान पहुंचाने के साथ लोगों की रोजमर्रा की परेशानी और नाराजगी की बड़ी वजह भी हैं। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान यह मुद्दा और भी उभरकर सामने आता है क्योंकि अधिकांश सड़कों का रखरखाव स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है।

अप्रैल में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि सात मई के लिए निर्धारित चुनावों में पूरे ब्रिटेन में मतदाताओं के लिए सड़कों की हालत सबसे प्रमुख स्थानीय मुद्दा रही।

‘द एस्फाल्ट इंडस्ट्री एलायंस’ (एआईए) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि इंग्लैंड और वेल्स के स्थानीय सड़क नेटवर्क का 17 प्रतिशत हिस्सा खराब हालत में है। रिपोर्ट के अनुसार मरम्मत के लंबित कार्य को पूरा करने में 12 साल लगेंगे और 16.81 अरब पाउंड खर्च होंगे।

नेताओं के लिए गड्ढे भरने के आंकड़े गिनाकर वोट बटोरना आसान है, लेकिन इससे समस्या की जड़ नहीं सुलझती।

क्या है गड्ढों की वजह ?

गड्ढे अचानक नहीं बनते, होता यूं है कि सामान्य डामर सड़कों में बिटुमेन समय के साथ पुराना और भुरभुरा हो जाता है। वाहनों के बोझ से सड़क की सतह पर दरारें पड़ने लगती हैं। इन दरारों में पानी घुस जाता है और सर्दियों में जमने-पिघलने के चक्र तथा वाहनों के दबाव से ये दरारें चौड़ी होती जाती हैं और अंततः गड्ढे का रूप ले लेती हैं। जब तक गड्ढा सतह पर दिखता है, तब तक सड़क की भीतरी संरचना पहले ही कमजोर हो चुकी होती है।

मरम्मत का मौजूदा तरीका नाकाम क्यों

ब्रिटेन में गड्ढों की मरम्मत का तरीका ज्यादातर प्रतिक्रियात्मक है। यानी सड़क टूटने के बाद उसी हिस्से पर अस्थायी पैबंद लगा दिया जाता है। प्रयोगात्मक अध्ययनों से पता चलता है कि हर बार यह तरीका अपेक्षाकृत सस्ता जरूर पड़ता है, लेकिन लंबे समय में यह बेहद कमजोर साबित होता है।

बारिश के मौसम या सर्दियों में यह मरम्मत महज हफ्तों या महीनों में उखड़ जाती है। यह ‘‘पैबंद लगाओ और दोहराओ’’ का चक्र लागत बढ़ाता है, यातायात को बाधित करता है।

क्या हो सकता है दीर्घकालिक समाधान

इससे भी आगे जाकर एक भविष्योन्मुखी और सक्रिय सड़क प्रबंधन प्रणाली बनाई जा सकती है जो सड़क के पूरे जीवनकाल को ध्यान में रखे। इसमें मजबूत सड़क संरचना का निर्माण, नियमित निगरानी और समय पर निवारक रखरखाव शामिल हो।

डेटा विश्लेषण, कृत्रिम मेधा, स्वचालन और बिना नुकसान पहुंचाने वाले परीक्षण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां इस दिशा में काफी मददगार हो सकती हैं।

गड्ढों का अर्थशास्त्र

साक्ष्य बताते हैं कि निवारक रखरखाव पर आज खर्च किया गया एक पाउंड, 10 वर्षों में 4.20 पाउंड की बचत कराता है। यह इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन का स्थानीय सड़क नेटवर्क फिलहाल कितनी खराब स्थिति में पहुंच चुका है।

यदि अधिक टिकाऊ रखरखाव व्यवस्था अपनाई जाए, तो उसके सकारात्मक परिणाम तेजी से दिखाई दे सकते हैं।

पर्यावरण की दृष्टि से भी यही बात लागू होती है। परंपरागत रूप से गड्ढों को बार-बार कच्चे तेल से बने डामर से भरा जाता है जो इस प्रक्रिया को बेहद कार्बन-उत्सर्जन वाला बना देता है।

निवारक रखरखाव से सड़कें लंबे समय तक अच्छी हालत में रहती हैं, जिससे दीर्घकालिक कार्बन लागत घटती है। बाढ़ और लू जैसी चरम मौसमी घटनाएं जैसे-जैसे बढ़ रही हैं, सड़क संरचना को मजबूत बनाए रखना अब बेहद जरूरी हो गया है।

राजनीति सिर्फ गड्ढों पर क्यों अटकी है?

सीधा जवाब है-धन की कमी। लेकिन मामला इससे कहीं ज्यादा पेचीदा है। ‘नेशनल हाईवेज एंड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क’ के साथ किए गए हमारे अध्ययन में पाया गया कि लोग सड़कों को लेकर अपनी राय मुख्य रूप से अपने घर के एक किलोमीटर के दायरे की सड़कों की स्थिति देखकर बनाते हैं।

राजनीतिक परिदृश्य में गड्ढों को सुरक्षा संबंधी खतरा माना जाता है, इसलिए स्थानीय प्रशासन पर उन्हें जल्दी भरने का कानूनी दबाव भी रहता है। लेकिन गड्ढों की असली जड़ सड़क की भीतरी संरचना की खराबी न तो आंखों को दिखती है और न ही उसे उतना राजनीतिक महत्व नहीं मिलता।

स्थानीय निकायों को सड़क रखरखाव के लिए अलग-अलग मदों से धन मिलता है, लेकिन इसे कभी-कभी अन्य सेवाओं में लगा दिया जाता है। हालांकि ब्रिटेन सरकार ने हाल में इस पर रोक लगाने के नए नियम घोषित किए हैं।

इन सभी कारणों का नतीजा यह है कि सीमित बजट और लगातार गड्ढे भरने की मजबूरी के बीच निवारक रखरखाव पीछे छूट जाता है।

स्थानीय सड़क रखरखाव बजट के मौजूदा आवंटन की समीक्षा से पता चलता है कि कुल बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा प्रतिक्रियात्मक मरम्मत पर खर्च हो रहा है।

लेकिन गड्ढों की समस्या लगातार बढ़ रही है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में यह हिस्सा और बढ़ सकता है।

सड़क रखरखाव के लिए हाल में जो अतिरिक्त धनराशि (हर साल 0.5 अरब पाउंड) आवंटित की गई है, उससे कुछ मदद जरूर मिल सकती है। लेकिन यदि इसे निवारक उपायों पर खर्च नहीं किया गया, तो इसका असर सीमित ही रहेगा।

(द कन्वरसेशन) खारी नेत्रपाल

नेत्रपाल