US Israel Relations / Image Source : SCREENGRAB
नई दिल्ली : US Israel Relationsआज के दौर में अमेरिका और इजरायल की दोस्ती बिल्कुल ‘जय-वीरू’ की जोड़ी जैसी है। छोटा सा देश होने के बावजूद इजरायल, अमेरिका का इतना चहेता है कि अमेरिका उसके लिए रूस, चीन और सभी इस्लामिक देशों से टकराने को तैयार रहता है। यहाँ तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की खातिर अपनी पूरी राजनीतिक साख दांव पर लगा दी है। अगर इस दोस्ती में दरार आई, तो ट्रंप के लिए अपने ही देश की राजनीति में टिक पाना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका इजरायल को मध्य पूर्व में अपना एक ऐसा अजेय विमान वाहक पोत’ मानता है जिसे कोई डुबो नहीं सकता। तेल और गैस के भंडार वाले इस इलाके में इजरायल, अमेरिका की आंख और कान बनकर काम करता है और अमेरिकी हितों की रक्षा करता है।
अमेरिका हर साल इजरायल को अरबों डॉलर (की मदद देता है। इजरायल इसी पैसे से अमेरिकी हथियार खरीदता है और जब उन्हें युद्ध में इस्तेमाल करता है, तो अमेरिका को उन हथियारों का रियल-टाइम डेटा मिलता है। इससे अमेरिका को अपनी मिसाइलों और विमानों को सुधारने में मदद मिलती है।
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का नेटवर्क बहुत फैला हुआ है। अमेरिका को कट्टरपंथी संगठनों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जो बारीक जानकारियां इजरायल से मिलती हैं, वे उसे दुनिया की कोई और एजेंसी नहीं दे सकती।
अमेरिका को महाशक्ति बनाने में उन यहूदी बुद्धिजीवियों का बड़ा हाथ है जो जर्मनी से भागकर अमेरिका आए थे। अल्बर्ट आइंस्टीन ने परमाणु बम की नींव रखी, जॉन वॉन न्यूमैन ने आधुनिक कंप्यूटर बनाया और वर्नर वॉन ब्रौन ने नासा (NASA) को मून मिशन में कामयाबी दिलाई।
इजरायल को स्टार्टअप नेशन कहा जाता है। Intel, Google और Microsoft जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के सबसे बड़े रिसर्च सेंटर इजरायल में हैं। यहाँ की कंपनियों ने अमेरिका में लाखों नौकरियां पैदा की हैं, जिससे सिलिकॉन वैली और इजरायल के बीच एक अटूट आर्थिक रिश्ता बन गया है।
अमेरिका के भीतर AIPAC जैसे इजरायल समर्थक गुट बेहद शक्तिशाली हैं। कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति या सांसद इन लॉबियों के खिलाफ जाकर अपना राजनीतिक करियर खतरे में नहीं डालना चाहता। Netanyahu & trump साथ ही, अमेरिका का एक बड़ा ईसाई वर्ग इजरायल की रक्षा को अपना धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानता है।