Wedding Cost Survey. Image Source- IBC24 Archive
नई दिल्लीः Wedding Cost Survey: शादी जीवन का सबसे पवित्र और आनंददायक संस्कार मानी जाती है, लेकिन आज के दौर में यह संस्कार धीरे-धीरे दिखावे और प्रतिस्पर्धा का मंच बनता जा रहा है। शादी अब दो परिवारों के मिलन का उत्सव नहीं, बल्कि यह साबित करने का जरिया बन गई है कि किसके पास कितना पैसा है और कौन कितना भव्य आयोजन कर सकता है? इस बीच अब शादियों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
वेडिंग वायर के Newlyweds सर्वें के अनुसार भारतीय शादियों में औसतन 330 मेहमान आते हैं और एक शादी का कुल खर्च लगभग 29 लाख 60 हजार रुपये तक होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम खर्च के बाद भी हर मेहमान के पास आपके लिए औसतन सिर्फ 20 सेकंड होते हैं। यानी मेहमान सिर्फ सेंकेंड आपके पास रहते हैं।
वेडिंग वायर के एक सर्वे के अनुसार 65% मेहमान केवल खाने पर ध्यान देते हैं। 60% मेहमान शादी को फैशन शो की तरह लेते हैं, जहां वे अपने कपड़े दिखाने आते हैं। और 55% लोग सिर्फ सामाजिक औपचारिकता निभाने पहुंचते हैं। इस डर से कि अगर वे नहीं गए, तो सामने वाला भी उनकी शादी में नहीं आएगा। यानि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, शादी का अनुभव ज़्यादातर मेहमानों के लिए या तो प्लेट तक सीमित रहता है या कपड़ों तक।
Wedding Cost Survey: सबसे चिंताजनक पहलू भोजन की बर्बादी है। यूनिवर्सिटी ऑफ बेंगलुरु द्वारा हाल ही में 75 शादियों पर किए गए सर्वे में सामने आया कि करीब 20% खाना सीधे कचरे में चला जाता है। बुफे सिस्टम में खाना भूख के अनुसार नहीं, बल्कि दिखावे के अनुसार लिया जाता है। विडंबना यह है कि इस दिखावे की होड़ में एक औसत भारतीय परिवार अपनी सालाना आय से लगभग 6 गुना अधिक खर्च शादी पर कर देता है। नतीजा शादी के बाद जहां नए जीवन की शुरुआत सुकून से होनी चाहिए, वहां कर्ज, तनाव और आर्थिक असुरक्षा साथ चलने लगती है।