‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है बिहार का बजट : रोहिणी आचार्य

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‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है बिहार का बजट : रोहिणी आचार्य

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 08:52 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 08:52 PM IST

पटना, तीन फरवरी (भाषा) बिहार विधानमंडल में मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने तीखा तंज कसते हुए इसे “आंकड़ों की बाजीगरी” करार दिया और कहा कि यह राज्य की वास्तविक जरूरतों से कोसों दूर है।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने एक पोस्ट में बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार हर साल बड़े-बड़े आंकड़ों के साथ बजट पेश करती है, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाता।

उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास सूचकांकों पर गंभीरता से काम करना आज बिहार की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन प्रस्तुत बजट इस बुनियादी सवाल पर पूरी तरह मौन है।

उन्होंने कहा कि केवल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) या निवेश के आंकड़े गिनाने से आम लोगों की जिंदगी नहीं बदलती, जब तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समानता जैसे क्षेत्रों में ठोस सुधार नजर न आएं।

आचार्य ने ‘डबल इंजन सरकार’ के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नीति निर्धारकों को शायद यह भ्रम है कि विकास का ढिंढोरा हमेशा पीटा जा सकता है, लेकिन यदि लोगों को उनके अधिकार के रूप में बुनियादी सेवाएं नहीं मिलेंगी, गैर-बराबरी की खाई कम नहीं होगी और बिहार से श्रम शक्ति का पलायन लगातार जारी रहेगा, तो ये दावे अपने आप दम तोड़ देंगे।

उन्होंने चेताया कि विकास की कहानी तभी टिकाऊ होगी, जब उसका असर गांव, गरीब और मजदूर तक पहुंचे।

राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार आज भी देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल है। हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों से राज्य की विकास दर में गिरावट दर्ज की जा रही है।

आचार्य ने कहा कि पिछले दस वर्षों में लगभग 250 कारखाने बिहार से अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो चुके हैं, जो औद्योगिक माहौल को लेकर सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लगभग बीस वर्षों के शासनकाल को बजट और अर्थ-प्रबंधन के नजरिए से परखते हुए रोहिणी आचार्य ने कहा कि हर साल बजट का आकार तो बढ़ता है, लेकिन योजनाओं का प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं देता।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्रीय योजनाओं के लिए समय पर प्रस्ताव नहीं भेजती और यदि केंद्र से राशि आती भी है, तो उसका पूरा उपयोग नहीं हो पाता।

उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए 72 हजार करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया और कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी खर्च का हिसाब-किताब भी पारदर्शी नहीं है।

भाषा

कैलाश रवि कांत