संविधान की रक्षा के बहाने ‘लोकतंत्र-विरोधी गतिविधियां’ करते हैं कांग्रेस नेता : नड्डा

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संविधान की रक्षा के बहाने 'लोकतंत्र-विरोधी गतिविधियां' करते हैं कांग्रेस नेता : नड्डा

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 06:49 PM IST,
    Updated On - June 25, 2026 / 06:49 PM IST

पटना, 25 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने बृहस्पतिवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने का दावा करते हुए ‘लोकतंत्र-विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने का आरोप लगाया।

नड्डा ने यहां ज्ञान भवन में ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने समय-समय पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज कांग्रेस हमें लोकतंत्र का पाठ पढ़ाती है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी संविधान की प्रति लेकर चलते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले राहुल गांधी को अपनी दादी के उन कृत्यों के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए, जिन्होंने संविधान को तार-तार कर दिया था।’’

नड्डा ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा अदालतों से सरकारी प्रतिबंधों की न्यायिक समीक्षा का अधिकार छीन लिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन ने लोकतंत्र को अक्सर राजनीतिक सुविधा के साधन के रूप में इस्तेमाल किया है। उनकी राजनीतिक सोच हमेशा लोकतंत्र विरोधी रही है।’’

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर संवैधानिक प्रावधानों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘जवाहरलाल नेहरू ने आठ बार राष्ट्रपति शासन लगाया। इंदिरा गांधी ने करीब 50 बार निर्वाचित सरकारों को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाया। इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में जम्मू कश्मीर और सीमित अवधि के लिए मणिपुर को छोड़कर राष्ट्रपति शासन का व्यापक इस्तेमाल नहीं हुआ।’’

नड्डा ने आरोप लगाया कि ‘इंडिया’ गठबंधन की गतिविधियां ‘‘राष्ट्र को मजबूत करने की सोच’’ नहीं बल्कि ‘‘सत्ता प्राप्ति’’ की राजनीति से प्रेरित हैं।

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस द्वारा किए गए ‘‘अत्याचारों’’ को याद रखना जरूरी है ताकि भारतीय लोकतंत्र, जिसने उसे कुचलने की कोशिश करने वालों को पराजित किया, भविष्य में भी मजबूत बना रहे और ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

नड्डा ने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा था कि यदि इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं। इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है। यदि उनका बस चलता तो वे आरएसएस और अन्य राष्ट्रभक्त संगठनों पर भी प्रतिबंध लगा देते।’’

उन्होंने लोगों से कांग्रेस को हमेशा सत्ता से दूर रखने की अपील करते हुए कहा कि इससे आपातकाल जैसे ‘‘काले दिन’’ दोबारा नहीं लौटेंगे।

नड्डा ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान 1.31 लाख से अधिक लोगों को बिना न्यायिक समीक्षा के जेल में बंद किया गया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन ने भी इस स्तर के अत्याचार नहीं किए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) का इस्तेमाल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी उस पैमाने पर नहीं हुआ था, जिस पैमाने पर आपातकाल में किया गया।’’

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में एक करोड़ से अधिक लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई, जिनमें से लगभग 80 लाख नसबंदियां 1975 और 1976 में हुईं।

उन्होंने दावा किया, ‘‘आपातकाल के दौरान गांवों में डॉक्टरों के पहुंचते ही युवा पुरुष भाग जाते थे। यह मानवीय गरिमा पर बड़ा हमला था। दिल्ली में करीब 1.5 लाख मकान तोड़ दिए गए, जिससे लगभग सात लाख लोग बेघर हो गए। 300 से अधिक पत्रकारों को जेल भेजा गया और सेंसरशिप के कारण अखबारों में खाली स्थान छपते थे।’’

कार्यक्रम में मौजूद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाई, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने स्वतंत्रता और लोकतंत्र की भावना को कुचलने का प्रयास किया।’’

उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन के सेनानियों ने ऐसे प्रयासों के खिलाफ संघर्ष किया और तानाशाही के विरोध में चला आंदोलन भारतीय इतिहास में अद्वितीय था।

चौधरी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। बिहार सरकार भी इस दिशा में समर्पित भाव से काम कर रही है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बिहार में जेपी आंदोलन के सेनानियों को उनका पूरा सम्मान मिले।’’

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेपी आंदोलन के सेनानियों को सम्मान और पेंशन देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

उन्होंने घोषणा की कि जेपी आंदोलन के प्रत्येक प्रतिभागी को उचित मान्यता दी जाएगी और छूट गए नामों की पहचान करके उन्हें शामिल करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।

कार्यक्रम में जेपी आंदोलन के 385 प्रतिभागी उपस्थित थे, जिनमें से आठ को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल और राधा मोहन सिंह मौजूद थे।

भाषा कैलाश अमित

अमित