बेतिया राज संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नई नियमावली का प्रारूप तैयार

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बेतिया राज संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नई नियमावली का प्रारूप तैयार

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  • Publish Date - April 9, 2026 / 08:15 PM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 08:15 PM IST

पटना, नौ अप्रैल (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कहा कि बेतिया राज की संपत्तियों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, संरक्षण और निपटान के लिए नियमावली, 2026 का प्रारूप तैयार किया गया है।

यह नियमावली “बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाला अधिनियम, 2024 (बिहार अधिनियम 23, 2024)” के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनायी जा रही है।

मंत्री ने कहा कि बिहार एवं उसके बाहर स्थित बेतिया राज की सभी चल एवं अचल संपत्तियों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार के नियंत्रण में लाया जाएगा, ताकि उनका संरक्षण, प्रबंधन और जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि नियमावली अधिनियम की धारा-17 के तहत तैयार की गई है, जिसमें आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया, समाहर्ता द्वारा संपत्तियों पर कब्जा लेने की व्यवस्था, संपत्तियों का वर्गीकरण, प्रबंधन, निपटान, अपील और पुनरीक्षण से संबंधित विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि इससे बेतिया राज की संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विधिक स्पष्टता सुनिश्चित होगी।

मंत्री ने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और इच्छुक पक्षकारों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा।

सिन्हा ने कहा कि आपत्तियों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष अधिकारी नामित किए जाएंगे, जिन्हें दिवानी न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होंगी और वे अधिकतम 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे।

उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है या आपत्तियां खारिज हो जाती हैं, तो समाहर्ता संबंधित संपत्तियों का प्रभावी कब्जा लेने की कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने कहा कि कब्जा में लेने के बाद संपत्तियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा, जिनमें ऐतिहासिक एवं विरासत संपत्तियां, सरकारी कब्जे वाली संपत्तियां, वैध पट्टाधारकों के कब्जे वाली संपत्तियां तथा बिना दस्तावेज वाले कब्जे शामिल होंगे।

सिन्हा ने कहा कि नियमावली में लंबे समय से रह रहे वैध अधिभोगियों को राहत देते हुए पूर्ण स्वामित्व में रूपांतरण का प्रावधान किया गया है ।

उन्होंने कहा कि इसके लिए 40 वर्ष के प्रभावी कब्जे को मानक माना गया है तथा एक जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित की गई है।

उन्होंने कहा कि इस तिथि से पहले जिन अधिभोगियों का कब्जा है उन्हें वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने पर निर्धारित राशि का भुगतान कर संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में परिवर्तित करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि एक जनवरी 1986 के बाद कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के भवन को अधिग्रहित किया जा सकेगा तथा उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन मामलों में कोई वैध दस्तावेज या दीर्घकालिक कब्जे का प्रमाण नहीं मिलेगा, उन्हें अनधिकृत अधिभोगी मानते हुए बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत बेदखली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

मंत्री ने कहा कि बेतिया राज की कई संपत्तियां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी विरासत संपत्तियों के संरक्षण, नवीकरण और सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की तकनीकी सहायता ली जाएगी, ताकि उनकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रह सके।

सर्वेक्षण के अनुसार बिहार के विभिन्न जिलों में बेतिया राज की भूमि पश्चिम चम्पारण में 16,671.91 एकड़, पूर्वी चम्पारण में 7,640.91 एकड़, सारण में 109.96 एकड़, सिवान में 7.29 एकड़, गोपालगंज में 35.58 एकड़ और पटना में 11.49 एकड़ है। कुल मिलाकर 24,477.14 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।

भाषा कैलाश राजकुमार

राजकुमार