पटना, 21 फरवरी (भाषा) बिहार में 2025-26 में पराली जलाने के कारण 1,807 किसानों का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) पंजीकरण निलंबित कर दिया गया है। कृषि विभाग द्वारा राज्य विधानसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार पराली जलाने के खिलाफ सरकार की सलाह का उल्लंघन करने के कारण 2025 में 1,758 किसानों की सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि रोक दी गई।
इसके अनुसार, इस वर्ष अब तक इसी तरह के उल्लंघनों के लिए 49 और किसानों के डीबीटी पंजीकरण निलंबित कर दिए गए हैं।
इसमें कहा गया है कि डीबीटी किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत सीधे वित्तीय सहायता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने और मिट्टी की उर्वरता में कमी को रोकने के लिए पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “सरकार ने सख्त चेतावनी जारी की थी कि पराली जलाने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता और सब्सिडी से वंचित कर दिया जाएगा। राज्य सरकार किसानों को रियायती दरों पर बिजली और सब्सिडी वाली कीमतों पर डीजल समेत अन्य सहायता प्रदान करती है।”
शुक्ला ने किसानों से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के हित में इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पराली जलाने को हतोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किए हैं और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी भी दे रही है।
विधानसभा में हाल में पेश किए गए बिहार आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) में बताया गया है कि 2024 में 4,596 किसानों के डीबीटी पंजीकरण निलंबित कर दिए गए थे। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है।
भाषा तान्या देवेंद्र
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