भाजपा मंगलवार को बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री चुन सकती है

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भाजपा मंगलवार को बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री चुन सकती है

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 04:32 PM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 04:32 PM IST

पटना, 13 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने सोमवार को कहा कि बिहार में पार्टी के ‘‘पहले मुख्यमंत्री’’ के नाम का ऐलान मंगलवार को होने की संभावना है।

इस बीच, सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पटना पहुंचने की उम्मीद है।

भाजपा मुख्यालय द्वारा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए ‘केंद्रीय पर्यवेक्षक’ नियुक्त किए गए चौहान ऐसे दिन राज्य का दौरा करेंगे, जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार के इस्तीफा देने की संभावना है। बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे कुमार के मंगलवार को 11 बजे निर्धारित मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक के बाद राजभवन जाकर इस्तीफा सौंपने की उम्मीद है। यह उनके पद छोड़ने की औपचारिक घोषणा हो सकती है।

भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय सरावगी ने संवाददाताओं से कहा, “शिवराज सिंह चौहान जी कल पटना आ रहे हैं और उनकी मौजूदगी में भाजपा विधायक अपने नेता का चुनाव करेंगे।”

दिलचस्प बात यह है कि इस बदलाव से भाजपा को हिंदी पट्टी के उस राज्य में मुख्यमंत्री पद मिलने जा रहा है, जहां अब तक वह इस कुर्सी से दूर रही है। पार्टी नेताओं के बयान संयमित हैं।

पिछले साल नवंबर तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे राज्य के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, “यह हमारे लिए भावनात्मक क्षण है। हमें उम्मीद है कि नीतीश कुमार नयी सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे।”

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 202 सीट के साथ प्रचंड बहुमत प्राप्त है। उनमें भाजपा की 89, जदयू की 85 और बाकी अन्य सहयोगी दलों लोजपा (रामविलास), हम और रालम की सीट हैं।

हालांकि, संभावित मुख्यमंत्री के नाम पर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने कहा, “यह विधायक दल का सामूहिक अधिकार है। मैं कोई अनुमान नहीं लगाना चाहता। शिवराज सिंह चौहान के आने के बाद सब स्पष्ट हो जाएगा।”

नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन अटकलें हैं कि यह 14 अप्रैल को हो सकता है। ऐसी भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस अवसर पर उपस्थित रह सकते हैं।

संभावित दावेदारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, जिनके पास गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी है। हालांकि, उनके आलोचक यह भी कहते हैं कि वह पारंपरिक ‘संघ परिवार’ पृष्ठभूमि से नहीं हैं और वह लंबे समय तक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तथा जदयू जैसे दलों में रहे हैं।

इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है, जिन्होंने 1980 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में कदम रखा था और 2019 में केंद्र सरकार में शामिल होने से पहले प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रहे।

भाजपा सूत्रों का मानना है कि नया मुख्यमंत्री “संभवतः पिछड़े वर्ग (ओबीसी) या दलित समुदाय से होगा”, क्योंकि पार्टी को अपने पारंपरिक ऊंची जाति समर्थन आधार के साथ-साथ अन्य वर्गों तक भी पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है।

इस बीच, जदयू नेता निशांत कुमार के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जिन्होंने हाल में पार्टी की सदस्यता ली है। कुछ नेताओं का दावा है कि 44 वर्षीय निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

उधर, पिता-पुत्र दोनों सत्ता से बाहर होने की स्थिति को सहजता से स्वीकार करते दिख रहे हैं और उनके सामान को मुख्यमंत्री आवास ‘एक, अणे मार्ग’ के पास स्थित एक अन्य सरकारी आवास में पहुंचाया जा रहा है, जहां अब नए मुख्यमंत्री का प्रवेश होगा।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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