Bilaspur High Court on CG Police Transfer Case || Image- IBC24 News File
बिलासपुर: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में लंबे समय से काम कर रहे 108 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। (Contractual Employees Regularization in Chhattisgarh) हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्मचारियों को नियमित लाभ नहीं मिलने पर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई।
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कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. अश्वनी दीक्षित को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। वहीं, कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल को शपथ पत्र पेश करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
मामला वर्ष 2008 से जुड़ा है। उस समय राज्य सरकार ने 10 साल की सेवा पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया था। (Contractual Employees Regularization in Chhattisgarh) इसी आधार पर गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति प्रो. एलएम मालवीय ने तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश जारी किया था। लेकिन वर्ष 2009 में विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद प्रबंधन ने पुराने आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने नियमितीकरण और अन्य लाभों के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार से हलफनामा मांगा था। कोर्ट ने हलफनामे को संतोषजनक नहीं माना। (Contractual Employees Regularization in Chhattisgarh) कोर्ट के मुताबिक इसमें केवल सेवानिवृत्ति के बकाया भुगतान का उल्लेख किया गया, जबकि कर्मचारियों को मिलने वाले नियमित वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी भी देनी थी। कोर्ट ने मामले को अवमानना से जुड़ा मानते हुए रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
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कर्मचारियों की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने उन्हें नियमित करने का दावा तो किया है, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय का कहना है कि यूजीसी से पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण वेतन संबंधी समस्या है। वहीं, कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें केवल एक महीने का मनमाना वेतन दिया गया और सभी को चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी मानकर वेतन तय किया गया, जबकि कर्मचारी अलग-अलग श्रेणियों में कार्यरत हैं। (Contractual Employees Regularization in Chhattisgarh) अब 2 सितंबर की सुनवाई में रजिस्ट्रार की व्यक्तिगत मौजूदगी और विश्वविद्यालय के जवाब पर हाईकोर्ट का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
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