ग्वालियर। Gwalior News : एमपी के ग्वालियर के रामजानकी मंदिर की जमीन के फर्जीवाड़े का मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, कोर्ट ने पुजारी की याचिका खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुई कहा कि मंदिर सरकारी संपत्ति है और पुजारी केवल प्रबंधक होता है, मालिक नहीं।
पंडित कैलाश नारायण दीक्षित ने कोर्ट में दावा किया था कि, चावड़ी बाजार स्थित म्युनिसिपल भवन उनके पूर्वजों के समय से उनके स्वामित्व में है (Gwalior News)। जिस पर कोर्ट ने पुराने रिकॉर्ड तलब किए। तो सामने आया कि 1960 से 1976 तक के दस्तावेजों में संपत्ति के मालिक के रूप में सिर्फ मंदिर श्री रामजी दर्ज था और उस पर टैक्स भी माफ था।
दस्तावेज में साबित हुआ कि वादी के दादा बाबूलाल दीक्षित को मंदिर में पूजा-अर्चना के बदले 15 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था (Gwalior News)। हाईकोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति वेतनभोगी पुजारी है, वह संपत्ति का स्वामी नहीं हो सकता।