Manoj Naravane Book Controversy || Image- The Economic Times
नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उनकी आत्मकथा “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, (Manoj Naravane Book Controversy) “पुस्तक की स्थिति यही है,” और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के आधिकारिक बयान का समर्थन किया।
This is the status of the book. https://t.co/atLtwhJvl0
— Manoj Naravane (@ManojNaravane) February 10, 2026
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में एक नया बयान जारी किया। प्रकाशक ने स्पष्ट किया कि पुस्तक की घोषणा की गई थी और उसे प्री-ऑर्डर के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन उसका प्रकाशन, वितरण या बिक्री अभी शुरू नहीं हुई है। प्रकाशक के अनुसार, यदि किसी भी रूप में इसकी प्रतियां प्रसारित हो रही हैं तो वह अनधिकृत है और कॉपीराइट का उल्लंघन है। प्रकाशन संस्था ने अपने बयान में कहा, “किसी भी पुस्तक को तभी प्रकाशित माना जाता है जब वह सभी अधिकृत खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से बिक्री के लिए उपलब्ध हो। प्री-ऑर्डर प्रकाशन की एक सामान्य प्रक्रिया है, जो पाठकों और विक्रेताओं को अग्रिम ऑर्डर देने की अनुमति देती है। पुस्तक अभी तक प्रकाशित या बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है।” प्रकाशक ने यह भी कहा कि “घोषित पुस्तक, प्री-ऑर्डर के लिए सूचीबद्ध पुस्तक और प्रकाशित पुस्तक—तीनों अलग-अलग चरण हैं,” और वह अपने प्रकाशनों में पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस पुस्तक के कथित अंशों का हवाला देते हुए दावा किया कि यह उपलब्ध है। उन्होंने जनरल नरवणे की वर्ष 2023 की एक सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि पुस्तक ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है। (Manoj Naravane Book Controversy) संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा, “जनरल नरवणे ने 2023 में ट्वीट किया था-‘मेरी किताब अब उपलब्ध है, लिंक पर क्लिक करें।’ या तो वे गलत हैं या पेंगुइन गलत है। दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते।”
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पुस्तक में ऐसे कथित बयान हैं जो सरकार के लिए असुविधाजनक हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता को तय करना चाहिए कि प्रकाशक या पूर्व सेना प्रमुख में से कौन सच बोल रहा है। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष ने संसद में कड़ा विरोध जताया। लोकसभा अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि अप्रकाशित सामग्री से उद्धरण न दिए जाएं।
इस बीच, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक विस्तृत बयान जारी कर कहा कि पुस्तक के प्रकाशन अधिकार उसके पास हैं, लेकिन अभी तक कोई भी मुद्रित या डिजिटल प्रति प्रकाशित, वितरित या बेची नहीं गई है। प्रकाशक ने कहा कि यदि किसी भी प्रारूप—चाहे वह पीडीएफ, डिजिटल या मुद्रित—में पुस्तक का कोई अंश प्रसारित हो रहा है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उधर, दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ ने पांडुलिपि के कथित लीक और प्रसार की जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर ली है। (Manoj Naravane Book Controversy) हालांकि, इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।