Priests Employee Status and Minimum Wage || AI Generated Image File
नई दिल्ली: क्या सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी और सेवादार ‘कर्मचारी’ की श्रेणी में आते हैं? इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। (Priests Employee Status and Minimum Wage) याचिका में मांग की गई है कि देशभर के सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के कर्मचारियों, पुजारियों और सेवादारों के वेतन ढांचे की समीक्षा के लिए एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
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PIL in SC seeks minimum wages, employee status for priests and staff in state-controlled temples
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— ANI Digital (@ani_digital) May 10, 2026
वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि वर्तमान में कई मंदिरों के कर्मचारियों को मिलने वाला पारिश्रमिक, अकुशल श्रमिकों के लिए तय न्यूनतम वेतन से भी कम है। याचिकाकर्ता ने इसे “प्रणालीगत शोषण” (Systemic Exploitation) करार दिया है।
याचिका की मुख्य मांग यह है कि पुजारियों और मंदिर कर्मियों को ‘मजदूरी संहिता, 2019’ (Code on Wages, 2019) की धारा 2(k) के तहत ‘कर्मचारी’ घोषित किया जाए। दलील दी गई है कि जब सरकार किसी मंदिर का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण अपने हाथ में लेती है, तो वहां स्वतः ही ‘नियोक्ता और कर्मचारी’ (Employer-Employee) का रिश्ता बन जाता है। (Priests Employee Status and Minimum Wage) याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि सम्मानजनक वेतन से इनकार करना पुजारियों के ‘आजीविका के अधिकार’ का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के अनुसार, राज्य को अपने बंदोबस्ती विभागों (Endowments Departments) के माध्यम से एक ‘आदर्श नियोक्ता’ के रूप में कार्य करना चाहिए।
याचिका में एक गंभीर सवाल यह भी उठाया गया है कि राज्य सरकारें लाखों मंदिरों का प्रबंधन तो कर रही हैं, लेकिन इसी तरह का प्रशासनिक हस्तक्षेप मस्जिदों या चर्चों में देखने को नहीं मिलता। 2026 के महंगाई सूचकांक और जीवन यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए, याचिकाकर्ता ने अदालत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। वैकल्पिक रूप से, केंद्र और राज्य सरकारों को इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फैसलों की भावना के अनुरूप मंदिर कर्मियों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
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मठ-मंदिरों की सेवा करने वाले पुजारी, सेवादार, सफाईकर्मी और सुरक्षा कर्मचारी क्या इंसान नहीं हैं?
देशभर में लाखों मंदिर सरकारों के नियंत्रण में हैं।
मंदिरों का चढ़ावा सरकार लेती है, दान पर नियंत्रण सरकार का है, CCTV लगाकर दक्षिणा तक सीमित कर दी गई…
लेकिन जो लोग पीढ़ियों से… pic.twitter.com/lXLEvjzaxn— अखण्ड भारत संकल्प (@Akhand_Bharat_S) May 11, 2026
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