जनधन के 12 सालः डीबीटी के जरिए लाभार्थियों को 53 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित

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जनधन के 12 सालः डीबीटी के जरिए लाभार्थियों को 53 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित

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  • Publish Date - August 28, 2026 / 06:42 PM IST,
    Updated On - August 28, 2026 / 06:42 PM IST

नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (डीबीटी) के जरिये पिछले 12 साल में लाभार्थियों को 53 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या में राशि जनधन खाताधारकों को मिली है।

सरकार के नागरिक सहभागिता मंच ‘माईगव इंडिया’ ने शुक्रवार को ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ (पीएमजेडीवाई) की शुरुआत के 12 साल पूरे होने के मौके पर यह जानकारी दी।

माईगव इंडिया ने कहा, ‘डीबीटी के जरिये राशि सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंचने से बिचौलियों की भूमिका कम करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी एवं कुशल तरीके से पहुंचाने में मदद मिली है।’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को जनधन योजना की शुरुआत की थी। सरकार के अनुसार, यह दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेश पहल है।

माईगव इंडिया के अनुसार, इस समय देश में 59 करोड़ जनधन खाते हैं। इनमें करीब 33 करोड़ खाते महिलाओं के हैं, जो कुल जनधन खातों का 56 प्रतिशत है।

ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में 46 करोड़ जनधन खाते हैं, जो कुल खातों का 78 प्रतिशत है। करीब 100 प्रतिशत गांवों में पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है।

अब तक जनधन खाताधारकों को 41 करोड़ से अधिक रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं, 13.5 लाख से अधिक ‘बैंक मित्र’ शाखाओं से बाहर भी लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।

जनधन योजना के तहत बिना बैंक खाते वाले वयस्कों को किसी तरह की न्यूनतम शेष राशि और रखरखाव शुल्क के बगैर एक बुनियादी बैंक खाता उपलब्ध कराया जाता है। इसमें खाताधारकों को मुफ्त ‘रुपे डेबिट कार्ड’ के साथ दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर और 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिलती है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण