नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) देश का टायर निर्यात चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 7,700 करोड़ रुपये रहा। वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने और कच्चे माल तथा लॉजिस्टिक की बढ़ी लागत के बावजूद टायर निर्यात बढ़ा है। वाहन टायर बनाने वाली कंपनियों का संगठन एटीएमए ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
एटीएमए (ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन) ने वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि टायर का निर्यात मूल्य वित्त वर्ष 2025-26 में 27,312 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर रहा था। इसके बाद अब अप्रैल-जून 2026 में भी टायर निर्यात का प्रदर्शन मजबूत रहा है।
संघ ने कहा कि व्यापार समझौतों के जरिये बाजार तक बेहतर पहुंच और अनुकूल निर्यात नीतियों से उद्योग इस गति को बनाए रख सकता है तथा वैश्विक टायर विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
एसोसिएशन के अनुसार, पैसेंजर कार रेडियल (पीसीआर) टायर के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई और पहली तिमाही में इसका निर्यात मूल्य के लिहाज से 21 प्रतिशत बढ़ा है।
एटीएमए के चेयरमैन अरुण मैमन ने कहा, ‘‘पहली तिमाही में टायर निर्यात की उल्लेखनीय वृद्धि नए वित्त वर्ष की मजबूत शुरुआत को दर्शाती है। यह वैश्विक बाजारों में भारत में निर्मित टायरों की बढ़ती स्वीकार्यता तथा प्रौद्योगिकी, क्षमता, उत्पाद विकास और गुणवत्ता में उद्योग द्वारा किए जा रहे निरंतर निवेश को बताती है।’’
यूरोप भारत के टायर निर्यात की वृद्धि के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। यूरोप को टायर निर्यात पहली तिमाही में 25 प्रतिशत बढ़कर 3,003 करोड़ रुपये हो गया है। कुल भारतीय टायर निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही।
वहीं, अमेरिका सबसे बड़ा एकल निर्यात बाजार बना रहा है। पहली तिमाही में कुल टायर निर्यात मूल्य में अमेरिका की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत रही।
एटीएमए के मुताबिक, भारत में निर्मित टायर फिलहाल 170 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
भाषा यासिर रमण
रमण