एटीएफ की कीमतें दोगुनी हुईं; घरेलू विमानन कंपनियों के लिए सिर्फ 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी

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एटीएफ की कीमतें दोगुनी हुईं; घरेलू विमानन कंपनियों के लिए सिर्फ 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 02:33 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 02:33 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में आए उछाल के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) या विमान ईंधन की कीमत बुधवार को बढ़ाकर रिकॉर्ड 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से अधिक कर दी गई। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू विमानन कंपनियों पर इस वृद्धि का काफी कम बोझ डाला है। इसे वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में आए उछाल से निपटने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण कहा जा रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के अनुसार, घरेलू एयरलाइन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमत में सिर्फ 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। उन्हें विमान ईंधन 104,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर की कीमत पर मिलेगा।

दिल्ली में घरेलू एयरलाइन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमत में 8,289.04 रुपये प्रति किलोलीटर या 8.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कीमत बढ़कर 104,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। पिछले महीने यह 96,638.14 रुपये प्रति किलोलीटर थी।

घरेलू विमानन कंपनियों को अन्य संचालकों की तुलना में करीब आधी कीमत चुकानी होगी। गैर-निर्धारित (नॉन-शेड्यूल्ड), तदर्थ (एडहॉक) और ‘चार्टर’ जैसी अन्य उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 1,10,703.08 रुपये प्रति किलोलीटर से 114.5 प्रतिशत बढ़ाकर 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर की गई है।

इसके साथ ही, वाणिज्यिक एलपीजी (19 किलोग्राम के सिलेंडर) की कीमतों में 195.50 रुपये की वृद्धि की गई है।

देश में बिकने वाले चुनिंदा प्रीमियम या ब्रांडेड पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ाए गए हैं। इस प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल दो से पांच प्रतिशत तक है। इससे ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ डीजल की कीमत 1.50 रुपये बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं 100 ऑक्टेन पेट्रोल (एक्सपी100) की कीमत 11 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

सामान्य या बिना ब्रांड वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित हैं। घरेलू खाना पकाने वाली गैस एलपीजी की दरें भी यथावत हैं।

विमान ईंधन की कीमतों में वृद्धि के पीछे के तर्क को स्पष्ट करते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि भारत में एटीएफ की कीमतें 2001 में नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के एक सूत्र के आधार पर मासिक आधार पर संशोधित की जाती हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘ होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में असाधारण स्थिति के कारण, घरेलू बाजारों के लिए एटीएफ की कीमत में एक अप्रैल को 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद थी।’’

इसमें कहा गया, ‘‘ अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि से घरेलू यात्रा लागत को बचाने के लिए, पेट्रोलियम कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय के परामर्श से विमान कंपनियों पर केवल आंशिक एवं चरणबद्ध तरीके से 25 प्रतिशत (केवल 15 रुपये प्रति लीटर) की वृद्धि लागू की है। विदेशी मार्गों पर उड़ान भरने वाले यात्रियों को एटीएफ की कीमतों में पूरी वृद्धि का भुगतान करना होगा, जो कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भुगतान की जाने वाली कीमतों के अनुरूप है।’’

नागर विमानन मंत्रालय मंत्री के. राममोहन नायडू ने बुधवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के घरेलू विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन की कीमतों में आंशिक एवं चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू करने का फैसला यात्रियों को हवाई किराये में तेज वृद्धि से बचाने में मदद करेगा।

मंत्री ने कहा, ‘‘ यह सुनियोजित दृष्टिकोण यात्रियों को किराये में अचानक होने वाली वृद्धि से बचाने, घरेलू विमानन कंपनियों पर बोझ कम करने और इस महत्वपूर्ण समय में विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगा। इससे माल की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करके और व्यापार एवं लॉजिस्टिक के लिए महत्वपूर्ण हवाई संपर्क बनाए रखने से अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर लाभ होगा।’’

विमानन ईंधन की कीमतें 2001 से अधिक समय पहले नियंत्रण मुक्त कर दी गई थी और तब से इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानक कीमतों के अनुरूप तय किया जाता है। इसके अलावा एलपीजी की कीमतें भी नियंत्रण मुक्त हैं।

पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल को देखते हुए सरकार एवं सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने संतुलित बढ़ोतरी का तरीका अपनाया है।

सूत्रों के अनुसार, विदेशी विमानन कंपनियों और अन्य संचालकों को बाजार आधारित पूरी कीमत देनी होगी, जबकि घरेलू एयरलाइन कंपनियों के लिए कीमतों को नियंत्रित रखा गया है ताकि घरेलू हवाई यात्रा महंगी न हो।

यह पहला मौका है जब एटीएफ की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर को पार कर गई है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कीमतें बढ़कर करीब 1.1 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर पर पहुंची थीं।

एटीएफ कीमतों में एक मार्च को 5.7 प्रतिशत (5,244.75 रुपये प्रति किलोलीटर) की बढ़ोतरी की गई थी।

ईंधन की कीमतों में यह उछाल एयरलाइन कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव डालेगा क्योंकि कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रहती है। साथ ही पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कई हवाई मार्ग बंद होने से विमानों को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है जिससे ईंधन की खपत भी बढ़ रही है।

इसी के साथ 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर (होटल-रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाला) की कीमत भी 195.50 रुपये बढ़ा दी गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है।

घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमत में हालांकि कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में यह 913 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है।

सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अंतरराष्ट्रीय मानकों एवं विनिमय दर के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को विमान ईंधन तथा एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं।

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान से वैश्विक तेल कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल आ चुका है। वहीं पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले वर्ष मार्च में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद से स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर है।

एलपीजी की कीमतों पर मंत्रालय ने कहा कि उद्योगों व होटल द्वारा उपयोग किए जाने वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें नियंत्रण मुक्त हैं। बाजार द्वारा निर्धारित हैं और आमतौर पर मासिक आधार पर संशोधित की जाती हैं। इनकी खपत देश में कुल एलपीजी खपत के 10 प्रतिशत से भी कम है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘ एक अप्रैल को वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में हुई वृद्धि सऊदी अनुबंध मूल्य में 44 प्रतिशत की वृद्धि के कारण है जो मार्च में 542 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से बढ़कर अप्रैल में 780 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक एलपीजी आपूर्ति का 20-30 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसा होना है।’’

बयान में कहा गया कि घरेलू एलपीजी की दरों को अपरिवर्तित रखने के कारण पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को प्रति सिलेंडर 380 रुपये का नुकसान हो रहा है।

इसमें कहा गया, ‘‘ मई के अंत तक पेट्रोलियम कंपनियों का कुल घाटा लगभग 40,484 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। पिछले साल भी 60,000 करोड़ रुपये के कुल घाटे में से 30,000 करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने और 30,000 करोड़ रुपये भारत सरकार ने वहन किए थे, ताकि भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की ऊंची कीमतों से बचाया जा सके।’’

घरेलू एलपीजी की कीमत पाकिस्तान में 1,046 रुपये, श्रीलंका में 1,242 रुपये और नेपाल में 1,208 रुपये है। इनकी तुलना में भारत में दाम कम हैं।

प्रीमियम पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर मंत्रालय ने कहा, ‘‘ सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें (जिन पर भारत चलता है) अपरिवर्तित हैं, यानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है। पिछले एक महीने में वैश्विक पेट्रोलियम कीमतों में 100 प्रतिशत तक वृद्धि के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को 01.04.2026 की स्थिति में खुदरा बिक्री मूल्य स्तर पर पेट्रोल पर 24.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 104.99 रुपये प्रति लीटर की का घाटा (अंडर रिकवरी) हो रहा है।’’

मंत्रालय ने कहा, ‘‘ हाल की दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल प्रीमियम पेट्रोल किस्मों एक्सपी95, पावर95, स्पीड पर लागू होती है। ये उच्च ‘ऑक्टेन’ प्रदर्शन वाले उत्पाद हैं जिनकी कीमतों की समीक्षा पखवाड़े के आधार पर की जाती है और कुल बिक्री में इनकी मात्रा क्रमशः दो प्रतिशत तथा पांच प्रतिशत है। इन्हें मोटर चालक अपनी पसंद से अतिरिक्त कीमत देकर खरीदते हैं।’’

इसमें कहा गया कि भारत के हर पेट्रोल पंप पर सामान्य पेट्रोल और डीजल अपरिवर्तित कीमतों पर उपलब्ध हैं जबकि दुनिया के कई देशों में कीमतें 30-50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।

भाषा निहारिका अजय

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