HS Phoolka Joins BJP || Image- BJP File
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता और जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता एचएस फूलका आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए है। वर्षों तक कानूनी वकालत के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले फूलका के लिए यह नई सियासी पारी है। (HS Phoolka Joins BJP) राजधानी में पार्टी प्रवेश के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहें।
भाजपा में शामिल होने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने कहा, “मैं पिछले 40 वर्षों से 1984 के दंगों के पीड़ितों के लिए लड़ रहा हूं, और तब से भाजपा ने मेरा साथ दिया है। मैंने उनके साथ मिलकर अपनी लड़ाई लड़ी है। मैंने भाजपा के लिए बहुत कानूनी काम भी किया है। मैं 2014 से 2017 तक तीन साल तक आम आदमी पार्टी (AAP) में रहा । लेकिन मेरा घनिष्ठ संबंध शुरू से ही भाजपा के साथ रहा है।”
एचएस फूलका ने आगे बताया, “पंजाब में स्थिति वास्तव में खराब है, जबरन वसूली के फोन आ रहे हैं, वहां कानून व्यवस्था चरमराई हुई है, नशे का खतरा है और पंजाब की धरती 13-14 वर्षों में बंजर हो जाएगी। लेकिन सरकार को इसकी जरा भी परवाह नहीं है। इसलिए, मैं पंजाब के लिए राजनीति में लौट रहा हूं। भाजपा से बेहतर कोई पार्टी नहीं हो सकती जिसमें मैं लौट सकूं।”
VIDEO | Senior Supreme Court advocate and former Aam Aadmi Party (AAP) leader H S Phoolka joins BJP.
He says, “I’ve been a strong supporter of the BJP since my childhood. From 2014 to 2017, I was in the Aam Aadmi Party. We thought that we had come to this party to end all the… pic.twitter.com/KpR1VcbMA2
— Press Trust of India (@PTI_News) April 1, 2026
1984 सिख विरोधी दंगों के लिए वकालत करें वाले फूलका ने 2014 में आम आदमी पार्टी (आप) के साथ अपने राजनीति के शुरुआत की थी। उन्होंने पंजाब के लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था हालांकि वे कांग्रेस नेता रवनीत सिंह बिट्टू से चुनाव हार गए। (HS Phoolka Joins BJP) रवनीत सिंह बिट्टू बाद में खुद भाजपा में शामिल हो गए और फिलहाल केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
वही 2017 के पंजाब विधानसभा चुनावों में फूलका ने ढाका निर्वाचन क्षेत्र से अकाली नेता मनप्रीत सिंह अयाली को हराकर जीत हासिल की थी। उसी साल उन्होंने लगभग तीन महीनों तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया था। हालांकि, आम आदमी पार्टी के साथ उनका राजनीतिक सफर ज्यादा लम्बा नहीं रहा। 2015 में पार्टी के पदों से इस्तीफा देने के बाद, उन्होंने जनवरी 2019 में औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ दी। बाद में उन्होंने यह स्वीकार किया कि राजनीति में आना एक गलती थी और उन्होंने खुद को पूरी तरह से कानूनी काम के लिए समर्पित करने का फैसला किया।
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