नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू होने के नौ साल बाद उद्योग जगत में इसके प्रति रुख सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, कारोबार सुगमता बढ़ाने और जीएसटी की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए अनुपालन संबंधी जटिलताओं को दूर करना और मुकदमों की संख्या कम करना जरूरी है। एक सर्वेक्षण में यह बात कही गई है।
फिक्की और केपीएमजी इंडिया के संयुक्त जीएसटी सर्वेक्षण के अनुसार, बढ़ते डिजिटलीकरण और पारदर्शिता के माध्यम से जीएसटी में काफी परिपक्वता आई है, जिससे एक अधिक एकीकृत और कुशल अप्रत्यक्ष कर ढांचा तैयार हुआ है।
सर्वेक्षण में कहा गया कि उद्योग जगत अब भी कर व्यवस्था को सरल बनाने, नियमों में स्पष्टता लाने, विवादों के जल्द समाधान, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के सुगम प्रवाह और तकनीक आधारित अनुपालन को सुधार के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देख रहा है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, जीएसटी सुधारों के अगले चरण में कारोबारियों की मांग है कि कर प्रक्रिया को और आसान बनाया जाए, रिफंड जल्दी मिले, इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा निर्बाध हो और विवाद समाधान की व्यवस्था अधिक प्रभावी बने।
सर्वेक्षण में कहा गया, ‘जीएसटी लागू होने के नौ साल बाद यह सुधार भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एकीकृत करने और पारदर्शिता तथा डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। आगे चलकर अनुपालन की जटिलताओं को कम करना, क्रेडिट की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना, उलट कर ढांचे को ठीक करना और कर प्रशासन में निश्चितता लाना जरूरी होगा।’
जीएसटी में 17 अप्रत्यक्ष करों और 13 उपकरों (सेस) को समाहित किया गया था। इसे एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था।
सर्वेक्षण में शामिल करीब 53 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि कर प्रशासन अब अधिक सहयोगात्मक रवैये की ओर बढ़ा है। हालांकि, कर अधिकारियों के साथ बातचीत को लेकर उद्योग जगत की राय मिली-जुली रही। करीब 47 प्रतिशत प्रतिभागियों ने नियमों की व्याख्या और उनके क्रियान्वयन में अंतर की बात कही।
भाषा योगेश अजय
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